सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क– इंटीग्रेटेड ट्रेड .. न्यूज़ भोपाल : भारत में मंदिरों का विकास स्वनत: स्फू र्त भावना से हुआ। यहां पर मंदिर- धर्म, विद्या, व्याज़पार और राजनीति का केन्द्रद रहे हैं। मंदिरों से ही भारत में सामुदायिकता, बहुलता, समावेशिकता का विकास हुआ। भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान शिमला की फैलो अल्पना त्रिवेदी ने ये उद्गार जनजातीय संग्रहालय में व्याक्तह किये। दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान द्वारा आयोजित लोकरुचि संवाद में मुख्यउ वक्ताा के रूप में ‘भारत में मंदिर के मायने’ (Temple Matters) विषय पर बोलते हुए प्रो. त्रिवेदी ने कहा कि भारत में मंदिर मानव-जीवन का केन्द्र् रहे हैं। वे अन्न-क्षेत्र के साथ-साथ सेवा के भी प्रमुख केन्द्रर रहे हैं। मंदिर ही मानवे के समस्ता संस्काकरों की धुरी हैं, जिसका संबंध जन्मा से लेकर मृत्युभ संस्काररों तक जुड़ा है। उन्होंभने कहा कि मंदिरों के अलावा भारत में सम्पूसर्ण तीर्थ केन्द्रों से भारत एकता के सूत्र में बंधा हुआ है। त्रिवेदी ने कहा कि भारत में मंदिरों से कला, संगीत, साहित्यर, नृत्य आदि विकसित हुए। दरअसल भारत मंदिरों के माध्य म से ही कर्मभूमि के रूप में जाना जाता है। हम इनके माध्य्म से इतिहास रच रहे थे।

पर्यावरण की दृष्टि से मंदिरों का विशेष महत्वन
इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि प्रसिद्ध पुरातत्वविद् नारायण व्यासस ने मध्य्प्रदेश में मंदिरों के विकास पर प्रकाश डाला। शैलकला चित्रों से लेकर आधुनिक मंदिरों का उल्लेहख करते हुए उन्होंमने देव मूर्तियों के विकास परंपरा की चर्चा की और बताया कि भारत में पत्थरर का पहला मंदिर सांची में बनाया गया था। व्याहस ने कहा कि भारत में पर्यावरण की दृष्टि से मंदिरों का विशेष महत्वा है। अधिकांश मंदिरों के द्वार पर गंगा-जमुना की मूर्तियां इसका प्रमाण हैं।
मंदिर हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैः

कार्यक्रम की अध्य्क्षता कर रहे स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर के निदेशक कैलाश राव ने कहा कि संपूर्ण भारत के मंदिरों में बने द्वारपाल इतने शक्तिमान सम्पनन्नि बनाए जाते हैं कि उनसे अंदर बैठे भगवान की शक्ति का आभास हो जाता है। भारत के सभी शहर और गांव मंदिरों में ही बसते हैं। हमारे यहां देव को सर्वश्रेष्ठद समर्पित करने की परंपरा रही है।
इस लोकरुचि संवाद का आयोजन दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान द्वारा किया गया और संयोजन थिंक इंडिया ने किया। कार्यक्रम का संचालन दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान के निदेशक मुकेश कुमार मिश्रा ने किया। आभार प्रदर्शन थिंक इंडिया के संयोजक निर्विकल्पं शुक्लां ने किया। कार्यक्रम में नगर के अनेक प्रबुद्ध जनों के साथ मैनिट, एनएलआईयू, एसपीए, आईसर आदि संस्था ओं के छात्र भी सम्मिलित हुए।