आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : कैश फॉर क्वेरी केस में TMC नेता महुआ मोइत्रा की 8 दिसंबर को सांसदी चली गई थी। महुआ ने निष्कासन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी। आज 15 दिसंबर को इस मामले की सुनवाई जस्टिस संजीव खन्ना और एसवी भट्टी की बेंच करेगी। महुआ की ओर से वकील अभिषेक मनु सिंघवी कोर्ट में पेश होंगे।

अभिषेक मनु सिंघवी ने जस्टिस कौल से केस पर जल्द सुनवाई की मांग की थी। इस पर जस्टिस कौल ने कहा था- इस याचिका पर CJI चंद्रचूड़ फैसला लेंगे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, CJI चंद्रचूड़ ने 13 दिसंबर (बुधवार) को मामले को जल्द लिस्ट करने पर विचार करने की बात कही थी। इसके बाद मामले की सुनवाई के लिए आज (शुक्रवार) का दिन तय हुआ।

महुआ से सरकारी बंगला खाली कराने का आदेश देने की मांग

लोकसभा से निष्कासित TMC नेता महुआ मोइत्रा को जल्द ही सरकारी बंगला खाली करना पड़ सकता है। संसद की हाउसिंग कमेटी ने केंद्रीय आवास मंत्रालय को मंगलवार (12 दिसंबर) को पत्र लिखा था, जिसमें पूर्व सांसद महुआ को सरकारी बंगला खाली कराने का आदेश देने की मांग की गई थी।

BJP सांसद ने लगाए थे महुआ पर आरोप

BJP सांसद निशिकांत दुबे ने आरोप लगाया था कि उन्होंने लोकसभा में पैसे लेकर सवाल पूछे हैं। निशिकांत ने इसकी शिकायत लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से की थी। मामले की जांच के लिए एथिक्स कमेटी बनाई गई थी।

एथिक्स कमेटी की रिपोर्ट में महुआ को दोषी माना गया था, जिसके बाद महुआ के निष्कासन का प्रस्ताव 8 दिसंबर 2023 को लोकसभा में पेश हुआ था। महुआ के निष्कासन पर लोकसभा में पक्ष-विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई थी। आखिर में प्रस्ताव पर वोटिंग हुई, जिसमें विपक्ष वॉकआउट किया था। वोटिंग में महुआ को लोकसभा से निष्कासित करने प्रस्ताव पास हो गया।

कैश फॉर क्वेरी केस से जुड़े 4 मुख्य किरदार…

कैश फॉर क्वेरी केस में मुख्य रूप से चार किरदार रहे हैं। TMC नेता महुआ मोइत्रा, BJP सांसद निशिकांत दुबे, वकील जय अनंत देहाद्राई और रियल एस्टेट कंपनी हीरानंदानी ग्रुप के CEO दर्शन हीरानंदानी।

  1. महुआ मोइत्राः अमेरिका में पढ़ीं, लंदन में नौकरी और बंगाल में राजनीति

इस केस की मुख्य पात्र महुआ मोइत्रा हैं, जिन पर सारे आरोप हैं। TMC सांसद महुआ मोइत्रा मूलत: बैंकर हैं। बेसिक एजुकेशन के बाद मोइत्रा हायर एजुकेशन के लिए अमेरिका गईं। बाद में उनकी नौकरी लंदन के एक प्रतिष्ठित बैंक में लगी।

कुछ सालों में उनका नौकरी से मोह भंग हुआ और वे राजनीति में कूदीं। उन्होंने 2016 में पहला चुनाव पश्चिम बंगाल के करीम नगर विधानसभा से जीता था। 2019 में वे TMC के टिकट पर कृष्णानगर से लोकसभा चुनाव लड़ी और जीतीं।