आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा पर पैसे लेकर संसद में सवाल पूछने (कैश फॉर क्वेरी) के आरोप हैं। इस केस में आज यानी 9 नवंबर को एथिक्स कमेटी की बैठक जारी है। संभावना है कि कमेटी ड्राफ्ट रिपोर्ट को मंजूरी दे सकती है। इसके बाद रिपोर्ट लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला को सौंपी जाएगी।

एथिक्स कमेटी की बैठक पहले 7 नवंबर को होनी थी, लेकिन इसे पोस्टपोन कर दिया गया था। न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, एथिक्स कमेटी महुआ की सांसदी खत्म करने की सिफारिश कर सकती है।

महुआ का आरोप- अडाणी के पास पहुंचे गोपनीय दस्तावेज

उधर एथिक्स कमेटी की रिपोर्ट लीक होने पर महुआ मोइत्रा ने लोकसभा स्पीकर बिड़ला को लेटर लिखकर शिकायत दर्ज कराई। महुआ ने कहा कि एक प्राइवेट न्यूज चैनल ने कमेटी की रिपोर्ट पब्लिश कर दी। यह लोकसभा के नियमों का उल्लंघन है। सबसे हैरानी की बात है जिस चैनल में यह खबर चल रही वो अडाणी ग्रुप का है।

मेरे खिलाफ उसी बिजनेसमैन पर पैसे के बदले सवाल पूछने का आरोप लगा है। वही बिजनेसमैन एथिक्स कमेटी के गोपनीय दस्तावेजों को एक्सेस कर रहा है।

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने दावा किया कि महुआ मोइत्रा पर लगे आरोपी की जांच अब CBI कर सकती है। निशिकांत दुबे ने बुधवार को X पर लिखा- लोकपाल ने आज मेरी शिकायत पर आरोपी सांसद महुआ जी के राष्ट्रीय सुरक्षा को गिरवी रखकर भ्रष्टाचार करने पर CBI इन्क्वायरी का आदेश दिया है।

महुआ बोलीं- पहले 13 हजार करोड़ का घोटाला करने वाले अडाणी पर FIR करें

निशिकांत दुबे की पोस्ट के 40 मिनट बाद महुआ ने सोशल मीडिया हैंडल पर लिखा- मीडिया के लिए मेरा जवाब ये है:

  1. CBI पहले 13 हजार करोड़ रुपए के कोयला घोटाले में अडाणी पर FIR करे।
  2. राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा यह है कि कैसे संदिग्ध FPI स्वामित्व वाली (चीनी और संयुक्त अरब अमीरात सहित) अडाणी की कंपनियां गृह मंत्रालय से क्लियरेंस के बाद पोर्ट-एयरपोर्ट खरीद रही हैं।

इसके बाद CBI का मेरे घर पर जूते गिनने आने के लिए स्वागत है।

महुआ ने पूछा कि क्या लोकपाल को सिर्फ मेरे केस के लिए जिंदा किया गया है। गंभीर सवाल यह है कि कितने पत्रकारों को यह भी पता था कि मोदी के भारत में एक लोकपाल भी काम कर रहा है? इस केस में नई जांच जोक पाल से कम नहीं है।

यह जानकर बहुत खुशी हुई कि मोदीजी का लोकपाल अस्तित्व में है। कुछ चुनिंदा लोगों को इसके बारे में जानकारी कैसे मिली। लोकपाल ऑफिस ने बयान जारी क्यों नहीं किया?