आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : ‘कैश फॉर क्वेश्चन’ के आरोपों का जवाब देने के लिए पश्चिम बंगाल से TMC सांसद महुआ मोइत्रा लोकसभा की एथिक्स कमेटी के सामने 2 नवंबर को पेश हुई थीं। इसके कुछ घंटों बाद महुआ ने अपने ऊपर लगे आरोपों पर भास्कर से खुलकर बातचीत की। पढ़िए उनके जवाब…
सवाल- क्या आप बता सकती हैं कि एथिक्स कमेटी ने आपसे कैसे सवाल पूछे?
महुआ- उनकी पूछताछ का रवैया बहुत ही घटिया था। मुझे यह बताते हुए भी बुरा लग रहा है कि इस तरह के सवाल पूछे गए। आप कहती हैं कि फ्लां व्यक्ति आपका एक खास मित्र है। वह कितना खास है और क्या उसकी पत्नी को पता है? फिर कमेटी के चेयरमैन ने उनकी पत्नी का नाम लिया, फिर पूछा- क्या उसकी पत्नी, पूर्व पत्नी जानती है कि वह आपको कितना प्रिय है?
फिर उन्होंने पूछा- आप देर रात फोन पर बात करती हैं? देर रात आपके फोन कॉल का नेचर क्या है? आप कितनी बार बात करती हैं? क्या आप हमें 24 घंटे में अपने मोबाइल का कॉल लॉग दे सकती हैं? क्या आप हमें देर रात की कॉल लॉग दे सकती हैं? फिर मुझसे पूछा गया कि मैं पिछले पांच साल में कहां-कहां गई? किसके-किसके साथ रही? इस तरह की घटिया पूछताछ चल रही थी।
सवाल- जिस तरह से उन्होंने (कमेटी मेंबर्स) ने बात की, उसे कैसे देखती हैं?
महुआ- देखिए, वहां कोई ‘उन्होंने’ नहीं थे। इसे समझिए, अध्यक्ष के अलावा वहां कोई नहीं बोल रहा था। किसी भी सांसद को मुझसे सवाल करने की अनुमति नहीं थी, यही तो समस्या थी। BJP का भी कोई सांसद कुछ नहीं पूछ रहा था। सुबह 13 लोग थे, फिर लंच में परणीत कौर और वीडी शर्मा चले गए। जब मैं अंदर आई तो ये दोनों जा चुके थे। अध्यक्ष के अलावा केवल 10 लोग मौजूद थे। BJP से 5 और विपक्ष से 5 नेता थे।
केवल अध्यक्ष ही बोल रहे थे। वे सवालों की 10-12 पेज की स्क्रिप्ट लेकर आए थे। एक भी सवाल खुद से नहीं पूछा, दरअसल वे पढ़ रहे थे। इसलिए, एक या दो बार उन्होंने पढ़ने में गलती की। जैसे वे ‘जिल्टेड एक्स’ कहना चाहते थे, पर उन्हें यह शब्द ही पता नहीं था, इसलिए उसे ‘गिलेटेड एक्स’ कहा। मैंने कहा, गिलेटेड एक्स क्या होता है? वह उसी शब्द को दोहराते रहे और यहां-वहां देखने लगे। फिर एक BJP सांसद ने उनको सही शब्द लिखकर दे दिया।
सवाल लाइन से लिखे थे। जैसे एक के बाद दो, फिर तीन। यदि आप पहले वाले का उत्तर हां में देते हैं, तभी दूसरा सवाल लागू होता है। मैंने पहले का जवाब ‘नहीं’ दिया, तब भी चैयरमेन ने आगे के सवाल पूछे। यह बहुत गंदा था। विपक्षी सांसद इसका विरोध करते रहे। BJP सांसदों ने भी चेयरमैन का साथ नहीं दिया, वे चुप रहे।
जब एथिक्स कमेटी के चेयरपर्सन विनोद सोनकर बोल रहे थे या सवाल पूछ रहे थे तो कोई कुछ नहीं बोल रहा था। विपक्षी सांसद, BJP सांसद, महिला सांसद, किसी ने भी बिल्कुल चेयरमैन का समर्थन नहीं किया।
जब BJP के सांसद बाहर आए तो मुझे नहीं पता कि उन्होंने क्या कहा, यह अलग बात है, लेकिन अंदर उन्होंने कुछ नहीं कहा। विपक्षी सांसदों ने ही चेयरमैन को बार-बार चेतावनी दी कि आप ये सवाल नहीं पूछ सकते। सवाल NIC लॉगिन का है, गिफ्ट का है, उस पर जो भी कहना है, आप पूछ सकते हैं।
आखिर में सभी बोले कि वे इस चीरहरण में भागीदार नहीं बनेंगे। उनका इससे कोई लेना-देना नहीं है। वे सभी जाने के लिए उठ गए। फिर मैंने कहा- मैं यहां नहीं बैठूंगी। मैंने चेयरमैन से कहा- मैं रिकॉर्ड पर रखना चाहती हूं कि मैं सवाल पूछने के इस तरीके, अप्रासंगिकता, अनैतिक तरीके के विरोध में इस कार्यवाही में शामिल नहीं होऊंगी और मैं बाहर आ गई।
सवाल-इस पर चेयरमैन की प्रतिक्रिया क्या थी?
महुआ- उनकी प्रतिक्रिया की किसे परवाह है? वह कुछ नहीं कह सके, उसके पास कहने के लिए कुछ नहीं था, क्योंकि वह स्क्रिप्ट पढ़ रहे थे। बिना पढ़े वह अपना नाम भी नहीं बता सकते।
सवाल- आपने कहा- आपको एक कॉर्पोरेट ग्रुप निशाना बना रहा है। ऐसा क्यों?
महुआ- कृपया समूह का नाम बताएं। मैं मोदी-अडाणी के बारे में बोल रही हूं।
सवाल- लेकिन अन्य लोग भी हैं, जो उनके खिलाफ बोलते हैं?
महुआ- हां। राहुल (गांधी) ने उनके खिलाफ बोला है। उन्होंने उनके (राहुल) खिलाफ क्या करने की कोशिश की है? सबने देखा। इस समूह के खिलाफ सबसे मुखर नेता कौन हैं? वे कौन सी पार्टियां हैं, जो इस बारे में सबसे अधिक मुखर हैं? उन्होंने हर किसी के साथ ऐसा करने की कोशिश की है, जो उनके खिलाफ है।
केजरीवाल जी आज कहां हैं? कहां है AAP? उन्होंने इस पार्टी को जेल में डाल दिया। ED ने उन्हें चुनाव कैंपेन के बीच में बुलाया। सोचिए कि वे (BJP) और विपक्षी दल के साथ क्या कर रहे हैं। हर एक विपक्षी दल… देखिए उन्होंने तेजस्वी (यादव) के साथ क्या किया। 2024 चुनाव से पहले कोई कुछ नहीं कह सकता।
सवाल- क्या आप मानती हैं- किसी से लॉगिन डिटेल शेयर करना, एरर ऑफ जजमेंट और एथिकली गलत था?
महुआ- मैंने शेयर नहीं किया। कृपया समझें। मैंने कोई नियम नहीं तोड़ा। पहली बात- कोई नियम नहीं हैं। दूसरी बात- मैंने अपनी ईमेल आईडी किसी से साझा नहीं की। यह केवल एक लॉगिन पोर्टल है, जिसके जरिए आप केवल दो ही काम कर सकते हैं। एक- सवाल अपलोड करना। दूसरा- अपनी ट्रैवल रिएम्बर्समेंट डालना। केवल दो चीजें। कुछ और नहीं कर सकते ।
सवालों को अप्रूव करने के लिए OTP मेरे पास आता है। इसे दर्शन या उनके ऑफिस से जोड़ के नहीं देख सकते। दर्शन 6 मिलियन डॉलर का बिजनेस चलाता है। वह मेरे सवाल टाइप करने नहीं बैठे। मैंने उनसे सिर्फ यह कहा कि क्या मैं जो पूछना चाहती हूं, उसे कोई टाइप कर सकता है। बस इतना ही हुआ। मैंने अपने सवाल खुद बनाए। खुद ही उन्हें फ्रेम किया, किसी और ने नहीं।
एक बात और। पहला- कोई नियम नहीं है। दूसरा- OTP मेरे पास आएगा। इसलिए न तो दर्शन और न ही कोई कर्मचारी, कभी भी मेरे OTP के बिना कोई सवाल पूछ सकता हैं। मैंने सिर्फ सचिवीय (सेक्रेटियल) सहायता मांगी, जो मुझे संसदीय नियमों के तहत प्राप्त करने की परमिशन है। यह बहुत स्पष्ट है।
सवाल- लेकिन जो दुबई में रहता है, उनसे क्यों आपने सहायता मांगी?
महुआ- वे कहां रहते हैं, उससे क्या फर्क पड़ता है? वह भारतीय नागरिक हैं। क्या दुबई एक दुश्मन देश है? वह चंद्रमा पर रह सकता है, मेरा दोस्त है। आप ये सवाल क्यों नहीं पूछते कि UP में उनका 30 हजार करोड़ रुपए का निवेश है, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री ने वर्चुअली किया था। इसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी शामिल थे। अगर हीरानंदानी राष्ट्रविरोधी है तो यह कैसे हुआ?