आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : विधानसभा चुनाव में बंपर सीटें जीतकर मप्र में सरकार बनाने वाली भाजपा ने लोकसभा चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं। पार्टी ने हारे हुए बूथ पर खास फोकस किया है। इसकी वजह भी है- विधानसभा चुनाव के रिजल्ट में 29 संसदीय क्षेत्रों में से पांच में स्पष्ट रूप से पिछड़ गई है। यानी आज की स्थिति में उसे चार सीटों का नुकसान हो रहा है। इनमें तीन पर भाजपा के मौजूदा सांसद हैं। एक कांग्रेस के पास है और एक पर भाजपा के नरेंद्र सिंह तोमर इस्तीफा दे चुके हैं। इसके अलावा पांच और सीटों पर भाजपा की बढ़त लोकसभा की तुलना में कम हुई हैं। ये सीटें ग्वालियर-चंबल, महाकौशल और मालवा अंचल की हैं।
दैनिक भास्कर ने विधानसभा चुनाव के रिजल्ट का एनालिसिस लोकसभा सीटों के हिसाब से किया। पढ़िए कौन-सी सीटें फिलहाल भाजपा के लिए खतरे की घंटी हैं..
सबसे पहले बात उन 5 सीटों की जहां बीजेपी पिछड़ गई
छिंदवाड़ा में कांग्रेस ने बढ़त बनाई
2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा तीन विधानसभा क्षेत्र चौरई, सौंसर, परासिया में बढ़त बनाने में कामयाब हुई थी। कांग्रेस ये सीट महज 37,536 वोटों के अंतर से ही बचा पाई थी। विधानसभा चुनाव में छिंदवाड़ा लोकसभा की सभी सातों विधानसभा सीटें कांग्रेस ने जीती। 2019 के लोकसभा चुनाव के मुकाबले अपने वोटों में 91 हजार से ज्यादा की बढ़ोतरी की है।
मुरैना में लोकसभा की तुलना में बीजेपी का वोट शेयर 9 फीसदी घटा
लोकसभा में भाजपा के नरेंद्र सिंह तोमर ने यहां की सात विधानसभाओं में लीड ली थी, लेकिन विधानसभा चुनाव में भाजपा श्योपुर, विजयपुर, सबलगढ़, मुरैना व अम्बाह में हार गई। अब नरेंद्र सिंह तोमर दिमनी से विधायक एवं विधानसभा अध्यक्ष बन चुके हैं। पार्टी यहां किसी नए चेहरे की तलाश में जुटी है।
भिंड लोकसभा में पार्टी ने 8 में से 4 विधानसभा सीटें जीती
चंबल संभाग में आने वाले इस लोकसभा क्षेत्र की सभी 8 विधानसभाओं में भाजपा को 2019 में बढ़त मिली थी। इस विधानसभा चुनाव में भाजपा सिर्फ 4 ही सीट जीत पाई है। विधानसभा पैटर्न पर लोकसभा में भी वोट पड़े तो ये सीट पार्टी खो बैठेगी। इस सीट पर भाजपा को 10 फीसदी वोट शेयर बढ़ाने की भी चुनौती होगी।
ग्वालियर में लोकसभा के मुकाबले 2 सीटें और गंवाई
लोकसभा में पार्टी यहां की 6 विधानसभाओं में बढ़त लेने में सफल रही थी। पिछले चुनाव में 2 लोकसभा सीटों पर हार मिली थी। पर इस बार के विधानसभा चुनाव में भाजपा 4 सीट ही जीत सकी। लोकसभा में यदि विधानसभा के पैटर्न पर वोटिंग हुई तो पार्टी को हार का सामना करना पड़ सकता है।