सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : अग्निपथ योजना:-

1. अप्रैल 2022 में भारत सरकार द्वारा अनुमोदित और सितंबर 2022 से लागू अग्निपथ योजना भारतीय सशस्त्र बलों, अग्निवीरों और देश की सुरक्षा की दृष्टि से बिल्कुल विपरीत है। भारत सरकार की यह योजना भारतीय सशस्त्र सेनाओं की मूल अवधारणा, रूपरेखा, भूमिका और परंपराओं के खिलाफ होकर देशहित में नहीं है।
2. इस अग्निवीर योजना को इसके वर्तमान स्वरूप में तीनों सेवाओं के किसी भी वरिष्ठ अधिकारी द्वारा अनुशंसित, स्वीकृत और अनुमोदित नहीं किया गया था। जनरल एम एम नरवणे (सेवानिवृत्त), जो उस दौरान सेना प्रमुख थे, ने अपनी पुस्तक “Four Stars Of Destiny” में उल्लेख किया है कि जब इस योजना को मंजूरी मिल गई और पीएमओ कार्यालय से उनके संज्ञान में लाया गया तो इस योजना ने तीनों प्रमुखों को चौंका दिया।
3. भारतीय सशस्त्र सेनाएं लगभग 15200 कि.मी. भूमि सीमाएँ और लगभग 7000 किलोमीटर समुद्री सीमाओं की सुरक्षा कर रहे हैं। माना जाता है कि इस कर्तव्य को निभाने के लिए हमारे पास 14.5 लाख सशस्त्र सेनाओं के कर्मचारी होंगे, जिनमें से 13.69 लाख पीबीओआर (अधिकारी रैंक से नीचे के कार्मिक) हैं जिनमें जेसीओ, एनसीओ और जवान शामिल हैं। लगभग 10 वर्षों के बाद, इनमें से लगभग 75 प्रतिशत पीबीओआर (10.27 लाख) कम वेतन, कम प्रशिक्षण, कम अनुभव, कम सुविधाओं, कम मान्यता और अनुबंध पर 4 साल से कम सेवा वाले अग्निवीर होंगे। क्या वे हमारी सीमाओं की सुरक्षा कर पाएंगे। दूसरे, हमारी सशस्त्र सेनाएं कई उच्च तकनीकी हथियार प्रणालियों और उपकरणों से सुसज्जित हैं। इन उच्च तकनीक हथियार प्रणालियों को कौन संचालित करेगा; कौन उनका रखरखाव करेगा, कौन उनकी मरम्मत करेगा? 4 साल से कम अनुभवी अग्निवीर हथियार प्रणालियों की पूरी क्षमताओं और प्रभावशीलता और विशेष रूप से दुश्मन के खिलाफ इनके कुशल उपयोग को जानने में भी सक्षम नहीं होंगे।
4. जहां तक अग्निवीरों का सवाल है, उन पर सबसे ज्यादा असर पड़ने वाला है। उनकी सैलरी बहुत कम है। उनके पास अपने समकक्ष जवानों की तुलना में कोई सुविधाएं नहीं होंगी। रिटायरमेंट के बाद उन्हें जो 12 लाख रुपये मिलेंगे, उसमें से भी 50 प्रतिशत का योगदान उनका ही होगा। वर्तमान परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए आज के परिवेश अनुसार इस माहौल में इतनी रकम उनके लिए कुछ भी नहीं होगी। जहां तक नौकरी का सवाल है, उनके 80 प्रतिशत समकक्ष जो पूर्व सैनिक हैं और जिनके पास अधिक अनुभव और ज्ञान है, वे बेरोजगार हैं तो कम शैक्षणिक योग्यता और अनुभव के साथ उन्हें नौकरियां कैसे मिलेंगी?
5. जहां तक देश का सवाल है, पहले से मौजूद बेरोजगार युवाओं की भीड़ में एक और बड़ी फौज जुड़ जाएगी। इतनी बड़ी संख्या में ऐसे बेरोजगार युवा पर्यावरण के लिए गंभीर समस्याएँ पैदा कर सकते हैं। इन अग्निवीरों को देश को सीमाओं के साथ-साथ देश के अंदर से भी हो रही उथल-पुथल और उसकी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।