आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : आख़िर चुनाव प्रचार का ख़म ठुक चुका है। बडे दिनों बाद ही सही, कुछ राज्यों में ही सही, कांग्रेस के उम्मीदवारों की लिस्ट आ चुकी है। ज़ाहिर है कांग्रेस फूंक- फूंककर कदम रख रही है। हिन्दू विरोधी होने का आरोप न लग जाए इसलिए उसने अपनी लिस्ट नवरात्र के पहले दिन ही जारी की। लाख इंतज़ार के बावजूद पितृ पक्ष में सूची जारी करने का रिस्क नहीं उठाया।

बहरहाल कांग्रेस ने मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ का इंतज़ार तो ख़त्म कर दिया, लेकिन राजस्थान में अब भी सूखा पड़ा है। वहाँ पहली सूची अब तक जारी नहीं हो सकी। हो सकता है दिल्ली में गुटीय लड़ाई चल रही होगी। जैसी दो-ढाई साल राजस्थान में चलती रही, वैसी ही अब टिकट के नाम पर दिल्ली में चल रही होगी।

सब जानते हैं पिछले कुछ सालों से राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच लम्बा संघर्ष चलता रहा था। चूँकि राजनीति में चुनाव ही वह वैतरणी होती है जिसे पार करके जीता जा सकता है, इसलिए अपने-अपनों के लिए टिकट की ज़ोर आज़माइश निश्चित ही आलाकमान के सामने हो रही होगी। वर्ना पितृ पक्ष के गुजर जाने के बाद भी प्रत्याशियों की सूची में देरी का कोई कारण नज़र नहीं आता।

इस बीच गहलोत की दिल्ली में अजय माकन से मुलाक़ात कोई नया संकेत दे रही है। उल्लेखनीय है कि गहलोत- पायलट मनमुटाव के वक्त अजय माकन राजस्थान के प्रभारी महासचिव थे और ऐसा माना जाता है कि तब माकन का झुकाव कुछ पायलट की तरफ़ था। यही वजह है कि गहलोत और माकन के बीच खटास आ गई थी।

अब दिल्ली में गहलोत-माकन की मुलाक़ात हुई है तो इसके मायने यही हैं कि बर्फ़ पिघल रही है। हो सकता है गहलोत टिकटों के फ़ाइनल दौर में इस मुलाक़ात से पायलट को कुछ समझाना या कहलवाना चाहते रहे हों! जहां तक सचिन पायलट का सवाल है, राजस्थान की राजनीति में कुछ महीनों से उन्होंने चुप्पी साध रखी है। हो सकता है ऐसा करने के लिए उन्हें आलाकमान ने ही कहा हो।

बहरहाल, ऐसा समझा जाता है कि राजस्थान की सूची सोमवार रात या मंगलवार सुबह तक जारी हो जाएगी। क्योंकि नवरात्र शुरू हो जाने के बाद सूची में देरी करने का कोई लॉजिक बचा नहीं है। फ़िलहाल कुछ दिनों से अशोक गहलोत दिल्ली में जमे हुए हैं और सूची फ़ाइनल करके ही राजस्थान लौटेंगे।

चुनाव: नवरात्र शुरू होते ही चरम पर पहुँचने लगेगा चुनाव प्रचार

चुनावी चौसर बिछ चुकी है। घोषणावीर निकल चुके हैं मैदानों की तरफ़। ताज़ा घोषणा मध्यप्रदेश में कांग्रेस ने की है। पढ़ो और पढ़ाओ योजना। इसके तहत तक़रीबन एक करोड़ विद्यार्थियों को मुफ़्त शिक्षा देने और पाँच सौ से पंद्रह सौ रुपए हर महीने दिए जाने का प्रावधान है।