आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : केरल का एक जिला ऐसा है जहां के नागरिक को संविधान के प्रमुख बिंदु पता हैं। इस जिले का नाम कोल्लम है। यहां 10 साल की उम्र पार कर चुके हर बच्चे को संविधान का मूल ज्ञान है।
2 साल पहले केरल के नागरिकों को संविधान साक्षर बनाने के लिए एक अभियान शुरू किया गया, इसका नाम ‘सिटीजन प्रोग्राम’ था।
संविधान साक्षर होने से यहां के रहवासियों को कई सामाजिक विषयों से निपटने में मदद मिली है।
लोगों ने संविधान जानने के बाद क्या कहा…
कोल्लम निवासी पुलिस कांस्टेबल एस. साजिन कहते हैं, ‘इस पहल से उन्होंने सभी नागरिकों को सामान्य नजर से देखना शुरू किया। संविधान की जानकारी होने से स्थानीय समुदाय और पुलिस के बीच बेहतर संबंध बने हैं।’
बिजनेसमैन आर. अबी बताते हैं कि पहले लोगों को लगता था कि 26 जनवरी पर छुट्टी धार्मिक त्योहार होने से है। महिलाओं को अपने अधिकार पता नहीं थे। पर ट्रेनिंग के बाद लाेग जागरूक हुए हैं।
के.एल. संथा बच्चों को धार्मिक गीत सिखाते हैं। उन्होंने घर की दीवार पर एक तरफ धार्मिक तस्वीर तो दूसरी ओर संविधान प्रस्तावना की तस्वीर लगाई है।
आंगनवाड़ी कार्यकर्ता शोभना कहती हैं कि जब से उन्हें संविधान की शिक्षा मिली है, तब से वे आंगनवाड़ी बच्चों को संविधान का ज्ञान जरूर देती हैं।
समझ में आए इसलिए सरल वर्जन तैयार किया
भारत का संविधान आसानी से पढ़ा और समझा नहीं जा सकता है। इसमें एक प्रस्तावना, 12 अनुसूचियों और 105 संशोधनों के साथ 25 भागों में 470 लेख शामिल हैं। यहां तक कि वकीलों को भी इसे पूरी तरह समझने में कठिनाई होती है। इसलिए केरल इंस्टीट्यूट ऑफ लोकल एडमिनिस्ट्रेशन KILA ने संविधान का एक ऐसा संस्करण तैयार किया जो आसानी से समझने योग्य हो।\
संविधान के महत्वपूर्ण प्रावधानों को उनके दैनिक जीवन से जोड़कर समझाया गया है। इसने लोगों विशेष रूप से महिलाओं को उनकी ज्ञात भाषा और संदर्भों में संविधान के बारे में बहस और चर्चा में शामिल होने में सक्षम बनाया है।
7 लाख परिवारों को संविधान की जानकारी
सिटीजन प्रोग्राम के तहत 10 साल से ज्यादा उम्र वाले 22 लाख से ज्यादा नागरिक (7 लाख परिवार) संविधान साक्षर हुए हैं। इस प्रोग्राम के तहत पहले फेज में करीब 12 हजार परिवारों ने संविधान विषय पर परीक्षा भी दी। शीर्ष 100 परिवारों को सम्मान में टीवी-फ्रिज जैसे तोहफे दिए गए थे।