आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : हिमाचल प्रदेश के ट्राइबल जिला किन्नौर और लाहौल स्पीति की ऊंची चोटियों पर बीती रात हल्का हिमपात दर्ज किया गया। इससे पहाड़ों पर तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई। कई शहरों के तापमान में पिछले तीन दिन में 7 डिग्री तक पारा नीचे लुढ़का गया और ऊंचे क्षेत्रों में तापमान माइनस में चला गया है।

सूचना के अनुसार, स्पीति घाटी, काजा, रोहतांग दर्रा, कुंजम, किन्नौर के हांगो इत्यादि स्थानों पर ताजा बर्फबारी हुई है। बेशक अधिक ऊंचे क्षेत्रों में हल्का हिमपात हुआ है, लेकिन जिस तरह मौसम विज्ञान केंद्र शिमला में बर्फबारी को लेकर येलो अलर्ट जारी किया था, उसके मुताबिक बर्फबारी नहीं होने से स्थानीय लोगों सहित पर्यटकों में भी मायूसी है।

तापमान में भारी गिरावट

मौसम की करवट बदलने व हल्का हिमपात होने के बाद ठंड में जरूर इजाफा हुआ है। मौसम की करवट बदलने के बाद कल्पा व सोलन के अधिकतम तापमान में 24 घंटे के दौरान 5.2 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई। कल्पा का मैक्सिमम टैंपरेचर गिरकर 10.8 डिग्री और सोलन का 17.3 डिग्री पहुंच गया है। इसी तरह अन्य शहरों का मैक्सिमम टैंपरेचर भी गिरा है।

नारकंडा का अधिकतम तापमान में 5.1 डिग्री की गिरावट के बाद 9.3 डिग्री सेल्सियस, कुफरी का 4.1 डिग्री की गिरावट के बाद 9 डिग्री, केलांग का अधिकतम तापमान 3.2 डिग्री की गिरावट के बाद 7.9 डिग्री और शिमला का अधिकतम तापमान 4.2 डिग्री की कमी के बाद 13.6 डिग्री रह गया है।

एक दिसंबर तक मौसम खराब रहने का अनुमान

मौसम विभाग के अनुसार, वेस्टर्न डिस्टरबेंस (WD) अगले 4 दिन एक्टिव रहेगा। इससे अधिक ऊंचे व मध्यम ऊंचाई वाले इलाकों में एक दिसंबर तक मौसम खराब रहने या कुछेक स्थानों पर बारिश-बर्फबारी होने का पूर्वानुमान है।

पर्यटकों को एडवाइजरी

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के बाद स्थानीय लोगों सहित पर्यटकों को अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में नहीं जाने की एडवाइजरी दी गई है। बर्फ की वजह से सड़क पर भी फिसलन हो जाती है और ऑक्सीजन की कमी से सांस लेने में भी दिक्कत आती है। ऐसे में अधिक ऊंचे क्षेत्रों में जाना जोखिमभरा हो सकता है।

रोहतांग दर्रा जाने पर रोक

मौसम विभाग के अलर्ट के बाद रोहतांग के लिए पर्यटकों की आवाजाही रोक दी गई है। इसी मकसद से रोहतांग के लिए ऑनलाइन परमिट बनाने की साइट बंद कर दी है, क्योंकि समुद्रतल से 13,050 फीट की ऊंचाई पर रोहतांग में मौसम खराब होते ही बर्फबारी शुरू जाती है और यहां कुछ घंटों के भीतर ही काफी मात्रा में बर्फ जम जाती है। इससे लोगों के बर्फ में फंसने की संभावना रहती है।