आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : भाजपा ने या कहिए मोदी ने पूरे घर के बदल डाले। हालाँकि पुरानों को घर बैठाने के सिवाय इन फ़ैसलों में फ़िलहाल कुछ दिखाई नहीं देता। जो भी हो, कांग्रेस बेचारी इस फ़ालतू के झंझट में पड़ना नहीं चाहती। वह राजनीति में होकर भी पूरी तरह निर्मोही हो चुकी है। जीत-हार से बहुत दूर। एकदम अलग।
मध्य प्रदेश में पाँच साल पहले उसके पास युवा ज्योतिरादित्य सिंधिया थे, लेकिन उसने बुज़ुर्गवार कमलनाथ को आगे किया। फिर पाँच साल बाद हाल के चुनावों में उसके पास कमलनाथ के सिवाय कोई विकल्प नहीं बचा, क्योंकि सिंधिया को सालों पहले भाजपा ने चुरा लिया था।
अब पाँच साल बाद कांग्रेस के पास क्या रह जाएगा, कहा नहीं जा सकता। छत्तीसगढ़ में तो हो सकता है बघेल अगले चुनाव में भी ज़ोर मारें, लेकिन मध्य प्रदेश जैसी चोरी भाजपा ने राजस्थान में कर ली तो अगले चुनाव में यहाँ भी हाथ में शायद ही कुछ बच पाए। जी, बात पायलट की है। सचिन पायलट की। लोकसभा चुनाव से पहले उन पर भाजपा की नज़र गड़ी रहेगी।
उन्हें वही सब समझाया जाएगा जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछले चुनाव में राजस्थान की सभाओं में कहते रहे। पिता राजेश पायलट के साथ जो अन्याय किया गया, वही कांग्रेस अब बेटे सचिन के साथ भी कर रही है। बात समझ में आ गई तो पायलट भी उड़ सकते हैं। राजनीति की इस उड़ान का कोई निश्चित ठिकाना तो होता नहीं है। कहीं से भी, कहीं के लिए भी उड़ान भरी जा सकती है।
हालाँकि फ़िलहाल तो तीन राज्यों में हुई पराजय के बाद कांग्रेस के पास शब्द ही नहीं बचे हैं। लगता है उसके शब्दों पर भी भाजपा ने सेंधमारी कर ली है। अब कांग्रेस अपने ही वजूद की आँच के आगे, औचक हड़बड़ी में, खुद को ही सानती, खुद को ही गूँथती बार- बार, खुश है कि अभी तक है। वह भी और उसका वजूद भी।
ख़ैर इस हाल में भी कांग्रेस यह सोचकर तो तसल्ली कर ही सकती है कि मनुष्य के दो ही पाँव हैं और मुक़द्दर के हज़ारों। मुक़द्दर कभी भी चमक सकता है। दिन कभी भी पलट सकते हैं। तसल्ली रखिए। अच्छे दिन ज़रूर आएंगे।
ख़ैर, फ़िलहाल ठण्ड का मौसम है और तीन राज्यों में नए मुख्यमंत्रियों के नामों की बहार। जिस तरह भाजपा इस पद के लिए नए-नए नाम ढूँढकर ला रही है, लगता है- इन राज्यों में भी गुजरात फ़ार्मूला लागू करके मंत्रिमण्डल से भी तमाम पुरानों की छुट्टी करने वाली है। वैसे कांग्रेस के सामने सवाल और भी हैं, लेकिन इनके जवाब मिलने में अभी वक्त है।
कुछेक विदेश दौरों के संपन्न होने के बाद शायद कोई उम्मीद की जा सकती है! बुधवार को मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में सरकारों के शपथ समारोह चल रहे थे और उधर लोकसभा में कुछ लोगों ने स्मोक बम फोड़ दिए। संसद हमले की बरसी पर सुरक्षा में हुई इस गंभीर चूक का ज़िम्मेदार कौन है, पता लगना ही चाहिए।