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KGMU धर्मांतरण मामले के तार आगरा-एटा तक जुड़े, 100 से अधिक डॉक्टर-मौलाना जांच के घेरे में

सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क्स / आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ / एजेंसियाँ:लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में सामने आए कथित धर्मांतरण प्रकरण की जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है। स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की पड़ताल में इस मामले के तार आगरा और एटा के मेडिकल कॉलेजों तक जुड़ने की जानकारी सामने आई है। जांच एजेंसी के अनुसार, इस नेटवर्क से 100 से अधिक डॉक्टरों और मौलानाओं के संपर्क में होने की आशंका है। हालांकि, इनमें से सभी की भूमिका अभी साबित नहीं हुई है।

जांच में मुख्य आरोपी डॉ. रमीजुद्दीन उर्फ रमीज के करीबी बताए जा रहे डॉ. रिजवान मलिक का नाम भी सामने आया है। रिजवान एटा मेडिकल कॉलेज में करीब पांच साल तक तैनात रहा था। इसके अलावा आगरा के सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज (SNMC) के पूर्व और वर्तमान छात्रों के संपर्कों की भी जांच की जा रही है। एसटीएफ को 'इस्लामिक मेडिकोज' नाम के समूह के बारे में जानकारी मिली है। आरोप है कि इस समूह के माध्यम से मेडिकल कॉलेजों के पुराने और नए छात्रों के बीच संपर्क बढ़ाया जाता था तथा नए दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों को भी इससे जोड़ने की कोशिश होती थी।

जांच एजेंसी के सामने यह भी आरोप आया है कि जकात के नाम पर हर महीने करीब 10 लाख रुपये जुटाए जाते थे। इसके लिए मेडिकल कॉलेजों के हॉस्टलों में धार्मिक तकरीरें आयोजित की जाती थीं। बाहर से आने वाले मौलाना डॉक्टरों और छात्रों से संपर्क करते थे। एसटीएफ अब इस रकम के स्रोत, बैंक खातों और लेनदेन की जानकारी जुटा रही है। लखनऊ के अलावा आगरा, एटा, बस्ती, सहारनपुर और बरेली तक जांच का दायरा पहुंच चुका है।

मामले में महिला डॉक्टरों पर कथित दबाव, उत्पीड़न और धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर करने जैसे आरोपों की भी जांच हो रही है। एसटीएफ डिजिटल साक्ष्यों, आपसी संपर्कों और वित्तीय लेनदेन के आधार पर संदिग्धों की भूमिका की पड़ताल कर रही है। अधिकारियों की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस कथित नेटवर्क में कौन-कौन शामिल था और किसकी क्या भूमिका रही।


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