आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : कर्नाटक में जीका वायरस को लेकर हाई अलर्ट जारी किया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने गुरुवार (2 नवंबर) को बताया कि मच्छरों की एडीज इजिप्टी प्रजाति में वायरस मिला है।
अब तक किसी इंसान में जीका वायरस की पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि, बुखार से पीड़ित 33 लोगों के ब्लड सैंपल लिए गए हैं। इनमें 29 प्रेग्नेंट महिलाएं हैं। चार लोग तेज बुखार से पीड़ित हैं।
इनमें एक को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुणे की नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) में सभी के सैंपल भेजे गए हैं। अगले 10 दिनों में जांच रिपोर्ट आने की उम्मीद है।
अगस्त में छह तालाबों से लिए गए थे सैंपल
कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडू राव ने बताया कि अगस्त के आखिरी हफ्ते में चिक्काबल्लापुरा जिले के तलकायालाबेट्टा में छह तालाबों से एडीज इजिप्टी मच्छरों के सैंपल लिए गए थे। 25 अक्टूबर को रिपोर्ट आई, जिसमें जीका वायरस की पुष्टि हुई।
एहतियात के तौर पर तलकायालाबेट्टा के पांच किलोमीटर के दायरे में अलर्ट जारी किया गया है। इलाके के कुछ लोगों में बुखार और रैशेज के लक्षण थे। ऐसे मरीजों की निगरानी की जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग की 53 टीमें 888 घरों का कर रही सर्वे
चिक्काबल्लापुरा के हेल्थ ऑफिसर डॉ महेश कुमार ने बताया कि जिन 33 मरीजों के ब्लड सैंपल पुणे भेजे गए हैं, उनकी हालत अभी ठीक है। बुखार से पीड़ित एक मरीज जिला अस्पताल में भर्ती है। दूसरे मरीजों को डिस्चार्ज कर दिया गया है।
हमने 53 टीमें बनाई हैं। एक टीम में दो सदस्य हैं, जो तलकायालाबेट्टा के आसपास 888 घरों का सर्वे कर रहे हैं। लोगों की लगातार स्क्रीनिंग की जा रही है।
क्या है जीका वायरस?
जीका वायरस का संक्रमण एडीज इजिप्टी मच्छर के काटने पर होता है। यह मच्छर डेंगू और चिकनगुनिया की वजह भी बनता है। संक्रमित मरीज के साथ सेक्स करने पर यह स्वस्थ इंसान में भी फैल सकता है। जीका वायरस का पहला मामला 1947 में युगान्डा में दिखा था। इसके पांच साल बाद इंसानों में यह वायरस पाया गया था।
जीका वायरस के लक्षण
तेज बुखार आना, शरीर पर लाल धब्बे, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, सिर दर्द जीका वायरस के मुख्य लक्षण हैं। तेज बुखार के साथ बेचैनी और उल्टियां भी होती है। इन लक्षणों के कारण लोगों को पता नहीं चल पाता की वे जीका वायरस से संक्रमित हैं।
जीका की कोई वैक्सीन या इलाज नहीं है। डॉक्टर जीका से संक्रमित होने के बाद पर्याप्त मात्रा में आराम और लगातार पानी पीते रहने की सलाह देते हैं।
कितना खतरनाक है जीका?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, जीका वायरस से संक्रमित होने का सबसे ज्यादा खतरा प्रेग्नेंट महिलाओं में होता है। इसका असर जन्म लेने वाले बच्चे पर भी पड़ सकता है। WHO का कहना है कि जहां-जहां जीका के कारण महामारी फैली, वहां गुलिएन-बैरे-सिंड्रोम के मामले बढ़े। यह एक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है जो इंसान में लकवा और मौत की वजह बन सकता है।
प्रेग्नेंट महिलाओं में संक्रमण होने पर नवजात में माइक्रोसिफेली और दूसरी जन्मजात बीमारियां हो सकती हैं। इसे कन्जेनिटल जीका सिंड्रोम कहते हैं। यह गर्भवती महिलाओं की प्रेग्नेंसी में कॉम्प्लिकेशन बढ़ाने के साथ मिस्कैरेज का खतरा भी बढ़ाता है। ब्राजील में 2017 में आई महामारी बताती है कि इससे संक्रमित होने पर मौत का खतरा 8.3 फीसदी तक था।