आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : लोकसभा चुनाव से पहले बिहार में सियासी हलचल तेज हो गई है। सियासी गलियारे में इस बात की चर्चा तेज है कि JDU के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने CM नीतीश कुमार को राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से इस्तीफा सौंप दिया है। 29 दिसंबर को दिल्ली में होने वाली पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में इस पर औपचारिक मुहर लग जाने की संभावना है।

सूत्रों की मानें तो कभी नीतीश के करीबी रहे रालोजद प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा की एक साल के भीतर जदयू में वापसी हो सकती है। हालिया कुछ दिनों में उपेंद्र कुशवाहा और जदयू के नेताओं के बीच कई राउंड बैठक हुई है, लेकिन उपेंद्र कुशवाहा नीतीश कुमार का भरोसा चाहते हैं।

खबर में आगे बढ़ने से पहले उपेंद्र कुशवाहा के ये तीन बयान पढ़िए-

नीतीश जी जिस रास्ते पर चल रहे हैं, वो पार्टी के लिए सही नहीं है। वे पड़ोस के घर में अपना वारिस ढूंढ रहे हैं। आज नीतीश कुमार जिनको (तेजस्वी यादव) बढ़ाने की बात करते हैं, वह नेता प्रतिपक्ष थे, तब उन्होंने कहा था कि एक बेटा है आपको (नीतीश कुमार) वो भी आपका अपना है कि नहीं, आप ही जाानते हैं।

-जनवरी, 2023, पटना

नीतीश कुमार जी का भ्रम धीरे-धीरे टूट रहा है। आपकी राजनीति को ताकत देने के लिए उन्होंने आपसे दोस्ती नहीं की है। उन्होंने आपसे दोस्ती की है तो सिर्फ और सिर्फ अपने बेटे को मुख्यमंत्री बनाने के लिए। अगर नीतीश कुमार को कभी खून की जरूरत पड़ी तो उसे देने में सबसे पहले मेरा नाम ही होगा।

– सितंबर 2023, गया

बतौर नेता नीतीश कुमार का कद बहुत बड़ा है। उन पर पहले से भी कोई पर्सनल आरोप नहीं लगाता हूं। अगर नीतीश कुमार दोबारा से NDA में वापसी करना चाहते हैं तो NDA में उनकी पैरवी करने के लिए हम तैयार हैं।

-26 दिसंबर 2023, पटना

उपेंद्र कुशवाहा पिछले एक महीने से लगातार JDU के बड़े नेता के संपर्क में हैं। ये नेता नीतीश के बेहद भरोसेमंद माने जाते हैं। ये सीधा नीतीश कुमार का मैसेज उपेंद्र कुशवाहा तक पहुंचा रहे हैं। चर्चा तो इस बात की भी है कि नीतीश कुमार ने खुद उपेंद्र कुशवाहा से बातचीत की है, लेकिन इसकी पुष्टि कोई नहीं कर रहा है। खुद उपेंद्र कुशवाहा की तरफ से कुछ भी स्पष्ट नहीं किया गया है।

क्यों जदयू में वापस हो सकते हैं कुशवाहा

सूत्रों की मानें तो अभी तक एनडीए में ये स्पष्ट नहीं हो पाया है कि उपेंद्र कुशवाहा को कितनी सीटें मिलेंगी? चर्चा है कि ये अपने लिए 3 सीटें मांग रहे हैं, लेकिन बीजेपी की तरफ से 1-2 सीटों पर बार्गेनिंग चल रही है। ऐसे में उपेंद्र कुशवाहा की वो मंशा भी पूरी होती हुई दिखाई नहीं दे रही है। ऐसे में उन्हें इस मौके पर जेडीयू का ऑफर फायदे का सौदा लग रहा है।

नीतीश की जरूरत क्यों हैं कुशवाहा

लव-कुश (कोइरी-कुर्मी) नीतीश कुमार के कोर वोटर माने जाते हैं। सियासी जानकार की मानें तो उपेंद्र कुशवाहा के अलग होने से उन्हें इस वर्ग का एक बड़ा डेंट लगेगा। ये नीतीश कुमार भी समझते हैं। ऐसे में लोकसभा चुनाव से पहले एक बार फिर से डैमेज कंट्रोल करना चाहते हैं। हालांकि, नीतीश कुमार की पहचान एक ऐसे नेता की है जो अगले पल क्या फैसला लेने वाले हैं ये उनके बगल में बैठे नेता भी नहीं समझ पाते हैं।

कुशवाहा खेल बिगाड़ने में माहिर खिलाड़ी

सियासी जानकारों की माने तो उपेंद्र कुशवाहा कभी भी मास लीडर नहीं रहे। उनकी पहचान एक कास्ट लीडर के रूप में है। वो भले सीट जीत नहीं पाए, लेकिन सीट को हरवाने में सफल रहते हैं। कुशवाहा अकेले दम पर जब भी चुनाव लड़े 2.5 फीसदी वोट हासिल करने में सफल रहे।

चुनावी गणित के लिहाज से देखें तो बिहार की 243 विधानसभा सीटों में करीब 63 विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जहां कुशवाहा समुदाय के मतों की संख्या 30 हजार से ज्यादा है। राज्य में कुशवाहा समाज की आबादी 7-8 फीसदी है। यह नीतीश कुमार के कुर्मी वोट बैंक से लगभग दोगुनी ताकत है। बिहार में पिछड़े समुदाय की राजनीति में यादवों के बाद दूसरी सबसे बड़ी ताकत है।

अब समझिए क्यों उपेंद्र कुशवाहा नीतीश कुमार के साथ आने के संकेत दे रहे हैं

जातीय गणना की रिपोर्ट के बाद नीतीश कुमार पर सॉफ्ट हैं कुशवाहा

इन तीन बयानों के अलावा जातीय गणना की रिपोर्ट जारी होने के बाद उपेंद्र कुशवाहा ने अपनी नाराजगी जाहिर करने के लिए पार्टी के बैनर तले गांधी मैदन से राजभवन मार्च निकाला था। इसके बाद से उन्होंने नीतीश कुमार पर कोई भी बड़ा बयान नहीं दिया है। वो लगातार नीतीश कुमार को लेकर सॉफ्ट बने हुए हैं। पिछले एक महीने से तो वह पूरी तरह खामोश हैं।