आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : बिहार सरकार ने 2 अक्टूबर को जातीय गणना के आंकड़े रिलीज किए थे। इस मामले में आज सुप्रीम कोर्ट से बिहार सरकार को बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने जातीय गणना के जारी आंकड़ों पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा- हम किसी राज्य सरकार के किसी काम पर रोक नहीं लगा सकते।

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर बिहार सरकार को नोटिस जारी किया। जनवरी 2024 तक इस पर जवाब मांगा है। कोर्ट ने कहा कि हम इस मामले में विस्तृत सुनवाई करेंगे।

बता दें कि 3 अक्टूबर को याचिकाकर्ता की ओर से सुप्रीम कोर्ट से जातीय आंकड़े जारी किए जाने के मामले मे हस्तक्षेप की मांग की थी, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया था।

याचिकाकर्ताओं में एक सोच, एक प्रयास और यूथ फॉर इक्वेलिटी जैसे संगठन शामिल हैं। जस्टिस संजीव खन्ना और एसवीएन भट्टी की बेंच जातीय गणना मामले की सुनवाई हुई।

बिहार की आबादी 13 करोड़ 7 लाख 25 हजार 310

बिहार सरकार ने जातीय गणना का आंकड़े जारी किया है। 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के मौके पर यह आंकड़ा जारी किया गया। जारी आंकड़े के अनुसार बिहार की आबादी 13 करोड़ 7 लाख 25 हजार 310 है। इसमें सबसे बड़ी संख्या अत्यंत पिछड़ा वर्ग की है। यह 4 करोड़ 70 हजार 80 हजार 514 है।

वहीं दूसरे नंबर पर अति पिछड़ा वर्ग 3 करोड़ 54 लाख 63 हजार 936 है। अनुसूचित जाति की संख्या कुल 2 करोड़ 56 लाख 89 हजार 820 है। अनुसूचित जनजाति की आबादी मात्र 21 लाख 99 हजार 361 बताई गई है। सामान्य वर्ग की संख्या 2 करोड़ 2 लाख 91 हजार 679 हैं।

अब जातीय गणना पर सरकार जारी सरकार के आंकड़े देखिए…

28 अगस्त को बदला गया था हलफनामा

सुप्रीम कोर्ट में 28 अगस्त को सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने हलफनामा दायर किया था। केंद्र सरकार ने सुबह में हलफनामा दाखिल किया, जिसे कुछ घंटे बाद उसे वापस लेते हुए दूसरा हलफनामा दाखिल किया। पहले हलफनामे के पैरा 5 में लिखा था कि सेंसस एक्ट 1948 के तहत केंद्र के अलावा किसी और सरकार को जनगणना या इससे मिलती-जुलती प्रकिया को अंजाम देने का अधिकार नहीं है।

हालांकि, फिर केंद्र ने इस हिस्से को हटाते हुए नया हलफनामा दायर किया था । इसमें कहा था कि पैरा 5 अनजाने में शामिल हो गया था। नया हलफनामा संवैधानिक और कानूनी स्थिति साफ करने के लिए दायर किया है। केंद्र सरकार भारत के संविधान के प्रावधान के अनुसार SC/ST/SEBC और OBC के स्तर को उठाने के लिए सभी कदम उठा रही है।

पटना हाईकोर्ट से मिल चुकी है हरी झंडी

इससे पहले बिहार सरकार पटना हाईकोर्ट में कह चुकी है कि यह जनगणना नहीं बल्कि सर्वे है। इसके बाद ही पटना हाईकोर्ट ने बिहार सरकार को सर्वे कराने को हरी झंडी दी थी। सुनवाई के दौरान बिहार सरकार की ओर से बताया गया था कि बिहार में सर्वे का काम पूरा हो चुका है। आंकड़े भी ऑनलाइन अपलोड कर दिए गए हैं। इसके बाद याचिकाकर्ता के वकील ने बिहार में हो रही जातीय गणना का ब्योरा रिलीज कराने की मांग कर दी थी।

इसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट तौर पर कहा था कि बिहार सरकार का पक्ष सुने बिना कोई रोक नहीं लगाई जा सकती। इससे पहले 14 अगस्त को सुनवाई टल गई थी। इस मामले पर दाखिल की गई दूसरी याचिकाएं भी 18 अगस्त को लिस्टेड थी।