आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल: टैगोर अंतर्राष्ट्रीय साहित्य कला महोत्सव ‘विश्वरंग’ का शुभारंभ गुरुवार को रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय परिसर में बड़ी धूमधाम से विश्व यात्रा के साथ हुआ। विश्वरंग महोत्सव पंचम संस्करण में देश–विदेश के सैकड़ों रचनाकारों, कलाकारों, साहित्यकारों, भाषाविदों सम्मिलित हैं। उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि डॉ. माधुरी रामधारी, महासचिव, विश्व हिंदी सचिवालय, मॉरिशस उपस्थित रहीं।  श्री संतोष चौबे, कुलाधिपति टैगोर विश्वविद्यालय और निदेशक विश्वरंग, सह निदेशक लीलाधर मंडलोई,  मुकेश वर्मा, वनमाली सृजन पीठ,  डॉ. अदिति चतुर्वेदी वत्स, विश्वरंग सह निदेशक, प्रो. रजनीकांत कुलपति आरएनटीयू, विश्वरंग सचिवालय के संयोजक जवाहर कर्नावट, अमेरिका से इंद्रजीत शर्मा और अनूप भार्गव, नीदरलैंड्स से रामा तक्षक और वैश्विक हिंदी परिवार संस्था से अनिल जोशी मौजूद रहे।

इस दौरान मुख्य अतिथि डॉ. माधुरी रामधारी ने अपने वक्तव्य में कहा कि विश्वरंग के आयोजन में हिंदी को खिलखिलाते देखा जा सकता है और साहित्य जीवित दिखता है, कलाएं प्रफुल्लित नजर आती हैं। ऐसा आयोजन आज की महती आवश्यकता है। हिंदी को विश्व की भाषा बनाने के लिए विश्वरंग जैसे आयोजन महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। यदि इसकी शुरुआत मॉरिशस के विश्व हिंदी सचिवालय से हो तो हमें प्रसन्नता होगी। विश्वरंग जैसे अच्छे कार्य होते हैं तो वे वर्षों तक संजोए जाते हैं। विश्वरंग में हिंदी, संस्कृति और साहित्य को लेकर जो कार्य हो रहा है, वो सदियों तक लोगों की स्मृति में रहेगा। साथ ही उन्होंने हिंदी के प्रचार में विश्वरंग के निदेशक संतोष चौबे की भूमिका पर बात करते हुए कहा कि सबको साथ लेकर चलने की शक्ति को संयुक्त शक्ति कहते हैं और यह शक्ति संतोष चौबे के पास है। इसलिए वे इतनी विशाल परिकल्पना कर पाते हैं और टीम को लेकर आगे बढ़ रहे हैं।

वहीं विश्वरंग के निदेशक संतोष चौबे ने अपने वक्तव्य में कहा कि विश्वरंग वैचारिक व हिंदी के पक्ष में एक आंदोलन बन गया है। इसके तहत हिंदी और भारतीय भाषाओं में गहराई में उतरकर कार्य कर रहा है जिसके चलते यह बड़ा डोमेन बन गया है। हमारा मानना है हिंदी को अन्य भाषा के खिलाफत में नहीं देखना चाहिए क्योंकि प्रत्येक भाषा का अपना एक सम्मान और गरिमा है। इसमें बोलियों की भूमिका का एक अहम पहलू है। हमें उन्हें साथ लेकर चलना होगा। बोलियां ही भाषा को ताकत और रस प्रदान करती हैं। आगे अपने वक्तव्य में उन्होंने प्रवासी भारतीय के साहित्य पर बात करते हुए कहा कि हमें उसे गंभीरता से देखने की जरूरत है। उन्होंने कला, संस्कृति और साहित्य को एक संयुक्त शक्ति बताया जो जोड़ने का काम करती है। उन्होंने एनईपी को भी सराहा और भाषा को कौशल के रूप में देखने की बात कही।

इस मौके पर न्यूयॉर्क की संस्था के इंद्रजीत शर्मा द्वारा संतोष चौबे को पं. तिलक राज शर्मा स्मृति शिखर सम्मान प्रदान किया गया। उद्घाटन समारोह का संचालन टैगोर विश्व कला एवं संस्कृति केंद्र के निदेशक विनय उपाध्याय ने किया।

सरोद वादन में “एकला चलो रे…” से मोहा मन, कार्यक्रम की शुरुआत आमिर खान द्वारा सरोद वादन से हुई। जानकी बैंड में टैगोर की रचनाओं की प्रस्तुति, भगोरिया नृत्य और मालवी लोक संगीत ने बिखेरे लोक कलाओं के रंग, वहीं शहनाई पर गूंजे राग श्याम कल्याण, शहनाई वादन की प्रस्तुति मीर घराना कन्नोज के हाजी मोहम्मद याकूब अली खान द्वारा दी।