आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : उत्तराखंड के उत्तरकाशी में टनल में फंसे सभी मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। पूर्वी सिंहभूम के भक्तू मुर्मू के पिता बासेत उर्फ बारसा मुर्मू अपने बेटे का इंतजार करते रहे। बाहर खाट में बैठे- बैठे वो आने वालों से वहां का हाल पूछते थे। जिस दिन बेटा बाहर निकलने वाला था उसी दिन उनके सब्र का बांध टूट गया और जिस खाट में बैठे वह बेटे का इंतजार कर रहे थे उसी खाट से गिरकर उनकी मौत हो गयी। बेटा बाहर निकला तो पिता छोड़ कर चले गये। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है
एयरलिफ्ट की तैयारी में झारखंड सरकार
। झारखंड सरकार पहले ही सभी मजदूरों को एयरलिफ्ट करने की तैयारी में हैं। अब तक मिली जानकारी के अनुसार मजदूरों को 24 घंटे के बाद राज्य के प्रतिनिधियों को सौंपा जायेगा। बुधवार को जैप आईटी के सीईओ भुवनेश प्रताप सिंह के साथ संयुक्त राजेश प्रसाद उत्तरकाशी पहुंचेंगे। मजदूरों को देहरादून से एयरलिफ्ट कर दिल्ली लाया जायेगा। यहां झारखंड भवन में उनके ठहरने की व्यवस्था की गयी है। मजदूरों को फिर यहां से 30 नवंबर से लेकर 1 दिसंबर तक उनके गांव भेजा जायेगा।
बेटे के टनल से बाहर आने की खबर नहीं सुन सके पिता, सदमें से मौत
पूर्वी सिंहभूम जिले के डुमरिया प्रखंड के बांकीशोल पंचायत में बाहदा गांव निवासी भक्तू मुर्मू (29) के 70 वर्षीय पिता बासेत उर्फ बारसा मुर्मू अपने बेटे के बाहर आने की खबर तक नहीं सुन सके और उनकी जान चली गयी। 17 दिनों से पिता इंतजार करते रहे कि उनका बेटा अब वापस आयेगा। मंगलवार को सदमे में उनका निधन हो गया। ग्रामीणों के अनुसार सुबह 8:00 बजे नाश्ता करने के बाद बास्ते मुर्मू अपने दामाद ठाकरा हांसदा के साथ आंगन में खाट पर बैठे थे। अचानक वह खाट से नीचे गिरे और वही उनकी मौत हो गयी। उनके तीन बेटे हैं और तीनों ही निधन के वक्त उसके पास नहीं थे। भक्तू मुर्मू का बड़ा भाई रामराय मुर्मू भी कमाने के लिए चेन्नई में है। दूसरा भाई मंगल मुर्मू दूसरे गांव में मजदूरी करने गया था।
अभी निगरानी में रखे जायेंगे मजदूर
उत्तरकाशी में तैनात झारखंड श्रम नियोजन विभाग के संयुक्त श्रम आयुक्त सह जमशेदपुर के उप श्रम आयुक्त राकेश प्रसाद ने कहा, मजदूरों को 24 घंटे डॉक्टर की निगरानी में रखा जाना है। सेहत की पूरी जांच होने के बाद ही इन्हें वापस लाया जायेगा। झारखंड सरकार ने विशेष टीम भेजी थी जो मजदूरों की ताजा स्थिति की जानकारी भेज रही थी। दूसरी तरफ श्रम विभाग की लगातार परिजनों के संपर्क में था। परिजनों से बातचीत की जा रही थी।
परिवार में अब मनेगी दीपावाली
बच्चों के सुरंग में फंसे होने की वजह से इस साल परिवार ने ना दिपावली मनाई ना छठ। जैसे ही मजदूरों के बाहर निकलने की जानकारी सामने आई पूरे गांव में खुशी की लहर दौड़ गयी। परिजनों के घर कई लोग मिठाई लेकर पहुंचे हैं। मजदूर सुखराम बेदिया की भाभी ने देवर के बाहर आने की खुशी में मिठाई बांटी है। उन्होंने कहा, परिवार के सभी लोग लंबे वक्त से परेशान थे। पापा ( ससूर) ना तो ढंग से खा रहे थे ना ही खेती बाड़ी में ही उनका मन लग रहा था, अब उनकी वापसी के बाद हमने चैन की सांस ली है लेकिन असल खुशी तो उनके गांव लौटने पर ही होगी।
अनिल बेदिया की मां ने कहा कि मुझे खुशी है कि बेटा बाहर निकल गया है लेकिन मैं उसे जबतक अपनी आंखों से नहीं देख लेती। तब तक मेरे मन को तसल्ली नहीं मिलेगी। राजेद्र बेदिया के पिता श्रवण बेदिया ने कहा, जब से फंसे थे लोग कह रहे थे बस कुछ दिन और बस पहुंच गये। हमारे लिए सब्र का बांध टूटने लगा था लेकिन जैसे ही पता चला कि बेटा बाहर निकल गया है हमने राहत की सांस ली है। अब बस वो जल्द से जल्द हमारे पास लौट आये। अब हम उसे कहीं बाहर कमाने नहीं जाने देंगे।