सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क– इंटीग्रेटेड ट्रेड .. न्यूज़ भोपाल: भारतीय वन प्रबंध संस्थान, भोपाल द्वारा 08 जनवरी, 2024 को “पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं का महत्व” विषय पर आई.एफ.एस अधिकारियों के लिए पांच दिवसीय अनिवार्य प्रशिक्षण पाठ्यक्रम का शुभारंभ किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों में सेवारत 14 आईएफएस अधिकारियों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता मुख्य अतिथि दिलीप कुमार, आईएफएस, पीसीसीएफ (संरक्षण), म.प्र. प्रोफेसर प्रफुल्ल अग्निहोत्री, निदेशक, आईआईएम सिरमौर, डॉ. के. रविचंद्रन, आईएफएस, निदेशक, आईआईएफएम, डॉ.सी.पी. काला, अध्यक्ष (एमडीपी), आईआईएफएम एवं अद्वैत एडगांवकर, कार्यक्रम निदेशक, आईआईएफएम द्वारा की गयी।

अपने उद्घाटन भाषण में, मुख्य अतिथि दिलीप कुमार ने पर्यावरण परिवर्तन पर चर्चा करते हुए, पारिस्थितिक तंत्र को संरक्षित करने एवं वनीकरण को बढ़ावा देने पर आईएफएस अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने मध्य प्रदेश वन विभाग के प्रयासों की सराहना की और 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन प्राप्त करने के राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप, पारंपरिक वन क्षेत्रों के बाहर वन क्षेत्र बढ़ाने की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने आईआईएफएम, भोपाल द्वारा विशेष रूप से कान्हा और पन्ना जैसे टाइगर रिज़र्वों पर किए गए महत्वपूर्ण अध्ययन की भी सराहना की, जो की संरक्षण पहल में अग्रणी हैं।

आई.एफ.एस अधिकारियों को संबोधित करते हुए, आईआईएफएम के निदेशक के. रविचंद्रन ने पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं के मूल्यांकन में संस्थान के ट्रैक रिकॉर्ड पर प्रकाश डाला, जिसमें संस्थान द्वारा अभी तक 16 टाइगर रिज़र्वों की सहायता की जा चुकी है साथ ही इसी क्रम में चार अतिरिक्त टाइगर रिज़र्वों की सहायता करने की प्रतिबद्धता भी जताई। वनवासियों के लिए पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं के मूल्यांकन को समझने की आवश्यकता पर बल देते हुए, उन्होंने पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं के मूल्यांकन के विभिन्न पहलुओं की समझ को बढ़ाने के उद्देश्य से इस पाठ्यक्रम की आवश्यकता पर भी चर्चा की।

इस पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिष्ठित विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण दिया जायेगा, जिसमें पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं के मूल्यांकन तथा तरीके, म. प्र. में एनटीएफपी उत्पादन क्षमता का अनुमान, ‘इनवेस्ट’ का उपयोग करके कार्बन भंडारण का आकलन, गैर-मौद्रिक मूल्यांकन विधियाँ, समुदाय आजीविका के लिए कार्बन परियोजनाएं, पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएँ, टाइगर रिज़र्व का मूल्यांकन, आदि जैसे आवश्यक विषयों को शामिल किया गया है। इसके अतिरिक्त, वन विभागों की दक्षता बढ़ाने – प्रशिक्षण और कौशल सुधार के माध्यम से कैडर विकास की आवश्यकता पर एक इंटरैक्टिव चर्चा सत्र भी आयोजित किया जायेगा। प्रशिक्षण में यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट “उदयगिरि” का भ्रमण कार्यक्रम भी शामिल है।