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उत्तर प्रदेश की राजनीति में मौर्य, कुशवाहा, शाक्य और सैनी समाज की भूमिका को लेकर चर्चा तेज है। प्रदेश के कई क्षेत्रों में इन समुदायों की मौजूदगी चुनावी समीकरणों को प्रभावित करने की क्षमता रखती है। राजनीतिक दलों के लिए यह सामाजिक समूह महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में इनका मत चुनावी मुकाबले पर असर डाल सकता है।
समुदाय की आबादी को लेकर 2001 की सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट के आधार पर इसका हिस्सा करीब 6.69 प्रतिशत बताया जाता है। राजनीतिक विश्लेषण के अनुसार, प्रदेश की 100 से अधिक विधानसभा सीटों पर इस समूह के मतदाता चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की स्थिति में हैं। इनमें पूर्वांचल, बुंदेलखंड, ब्रज, रुहेलखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई क्षेत्र शामिल हैं।
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में इस समाज से जुड़े 14 विधायक चुने गए थे। वहीं, 2024 के लोकसभा चुनाव में बाबू सिंह कुशवाहा, देवेश शाक्य और नीरज मौर्य समाजवादी पार्टी के टिकट पर सांसद बने। प्रदेश सरकार में केशव प्रसाद मौर्य उपमुख्यमंत्री और जसवंत सिंह सैनी राज्यमंत्री हैं।
यह समुदाय किसी एक राजनीतिक दल का स्थायी वोटबैंक नहीं रहा है। भाजपा, सपा और अन्य दल अलग-अलग क्षेत्रों में इसके समर्थन के लिए प्रयासरत हैं। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले इस समाज की राजनीतिक भागीदारी, प्रतिनिधित्व और वोटिंग रुझान महत्वपूर्ण चर्चा का विषय बने हुए हैं।
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