आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : हिमाचल सरकार ने शनिवार को शिमला के छराबड़ा में फाइव स्टार वाइल्ड फ्लावर हॉल पर कब्जा कर लिया है। हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम (HPTDC) की डायरेक्टर मानसी सहाय को इस प्रॉपर्टी का एडमिनिस्ट्रेटर और AGM अनिल तनेजा को OSD तैनात लगाया गया है। टूरिज्म डायरेक्टर मानसी सहाय ने इसकी पुष्टि की है। इससे पहले HPTDC और जिला प्रशासन भारी पुलिस बल के साथ लगभग 30 गाड़ियों में छराबड़ा पहुंचा। इससे ओबरॉय प्रबंधन व स्टाफ में हड़कंप मच गया।
सरकार ने कोर्ट के आदेशों पर करोड़ों रुपए की इस प्रॉपर्टी की कब्जा किया है। 86 कमरों वाला वाइल्ड फ्लावर होटल अब HPTDC के पास रहेगा। इस तरह अब होटल की 22 एकड़ जमीन पर भी निगम का कब्जा हो गया है।
हिमाचल हाईकोर्ट अगस्त 2022 में ही ओबेरॉय ग्रुप की इस संपत्ति को सरकार द्वारा वापस लेने के निर्णय को सही बता चुका है। अदालत ने कंपनी के साथ किए करार को रद्द करने के सरकार को निर्णय को सही ठहराया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार के पास संपत्ति को ओबेरॉय ग्रुप से वापस लेने का पूरा अधिकार है।
1993 में आग के बाद जलकर राख हुआ था वाइल्ड फ्लावर
साल 1993 में भीषण आग लगने से वाइल्ड फ्लावर हॉल पूरी तरह से नष्ट हो गया था। इस स्थान पर नया होटल बनाने के लिए राज्य सरकार ने ईस्ट इंडिया होटल कंपनी के साथ करार किया था। करार के अनुसार कंपनी को चार साल के भीतर पांच सितारा होटल का निर्माण करना था। ऐसा न करने पर कंपनी को 2 करोड़ रुपए जुर्माना प्रतिवर्ष राज्य सरकार को अदा करना था। वर्ष 1996 में सरकार ने कंपनी के नाम जमीन को ट्रांसफर किया।
इसलिए सरकार ने कंपनी के साथ रद्द किया था करार
6 वर्ष बीत जाने के बाद भी कंपनी पूरी तरह होटल को उपयोग लायक नहीं बना पाई। साल 2002 में सरकार ने कंपनी के साथ किए गए करार को रद्द कर दिया। सरकार के इस निर्णय को कंपनी लॉ बोर्ड के समक्ष चुनौती दी गई। बोर्ड ने कंपनी के पक्ष में फैसला सुनाया था। सरकार ने इस निर्णय को हाईकोर्ट की एकल पीठ के समक्ष चुनौती दी।
हाईकोर्ट ने मामले को निपटारे के लिए मध्यस्थ के पास भेजा। मध्यस्थ ने कंपनी के साथ करार रद्द किए जाने के सरकार के फैसले को सही ठहराया था और सरकार को संपत्ति वापस लेने का हकदार ठहराया। इसके बाद एकल पीठ के निर्णय को कंपनी ने बैंच के समक्ष चुनौती दी थी।
बैंच ने कंपनी की अपील को खारिज करते हुए अपने निर्णय में कहा कि मध्यस्थ की ओर से दिया गया फैसला सही और तर्कसंगत है। कंपनी के पास यह अधिकार बिल्कुल नहीं कि करार में जो फायदे की शर्तें हैं, उन्हें मंजूर करे और जिससे नुकसान हो रहा हो, उसे नजरअंदाज करें। अब जाकर सरकार ने कोर्ट के आदेशों पर कब्जा किया है।
ब्रिटिश सेना के पूर्व कमांडर लॉर्ड किचनर का निवास रहा वाइल्ड फ्लावर
ब्रिटिश सेना के पूर्व कमांडर लॉर्ड किचनर का पूर्व निवास, वाइल्ड फ्लावर हॉल 5 सितारा रिसॉर्ट है, जो एक भव्य आलीशान घर के माहौल का अनुभव कराता है। वाइल्ड फ्लावर हॉल प्रकृति में खुद को खोने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है।
1909 में, लॉर्ड किचनर ने इंग्लैंड लौटने के बाद, वाइल्ड फ्लावर हॉल को रॉबर्ट हॉट्ज़ और उनकी पत्नी को बेच दिया गया। 1925 में, पुराने घर को ध्वस्त करने के बाद, होट्ज़ ने एक बढ़िया तीन मंजिला होटल बनवाया। आजादी के बाद होटल को भारत सरकार ने अपने कब्जे में ले लिया। 1971 तक यह इंडियन टूरिज्म के अंडर रहा। 1973 में इसे HPTDC को दिया गया। जिसमे 1993 तक वाइल्ड फ्लावर हॉल होटल चलाया।
1993 में शॉर्ट सर्किट के कारण आग की भेंट चढ़ा
5 अप्रैल 1993 को बिजली के शॉर्ट सर्किट के कारण भीषण आग से लकड़ी से बना होटल जलकर राख हो गया। इसके बाद, सरकार ने ओबेरॉय ग्रुप के माध्यम से यहां होटल बनाया।