आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : हिमाचल में डिप्टी CM और मुख्य संसदीय सचिव (CPS) की नियुक्ति को असंवैधानिक बताने वाली याचिका पर आज हाईकोर्ट में सुनवाई नहीं हो पाई। जजों की बैंच बदलने की वजह से अब यह मामला आगामी 7 दिसंबर को सुना जाएगा। पिछली सुनवाई तक इस मामले को न्यायाधीश विवेक और न्यायाधीश विपिन चंद्र नेगी सुन रहे थे। मगर, आगे से इस मामले को न्यायाधीश विवेक और न्यायाधीश संदीप शर्मा की डबल बैंच सुनेगी।

अदालत ने राजभवन से डिप्टी CM की शपथ को लेकर जो रिकॉर्ड तलब किया था, उसे कोर्ट ने अपने कब्जे में ले लिया है। आज की कार्यवाही के दौरान राज्य सरकार ने उस एप्लीकेशन को भी वापस ले लिया है, जिसमें सरकार ने केस को सुप्रीम कोर्ट ट्रांसफर करने की अर्जी दी थी।

हिमाचल सरकार अब सीधे सुप्रीम कोर्ट पहुंचकर हाईकोर्ट से केस को ट्रांसफर करने की पिटीशन डाल चुकी है। पिछले कल सुप्रीम कोर्ट में भी सरकार की पिटीशन पर सुनवाई नहीं हो पाई और आज हाईकोर्ट में भी सुनवाई नहीं हो पाई।

अगली सुनवाई में सरकार रखेगी अपना पक्ष

इस मामले में सरकार के वकील को कोर्ट में बहस करनी है। बीते 16 अक्टूबर की सुनवाई में सरकार ने दलील दी थी कि बहस के लिए कुछ वक्त दिया जाए। इसके लिए दिल्ली से सीनियर एडवोकेट आएगा और वह सरकार की बात रखेगा। इस मामले में 3 अलग-अलग याचिकाकर्ताओं के वकील 16 अक्टूबर को कोर्ट में बहस पूरी कर चुके हैं।

हिमाचल में छह CPS

मुख्यमंत्री सुक्खू ने रोहड़ू से MLA मोहन लाल बराक्टा, अर्की से संजय अवस्थी, कुल्लू से सुंदर सिंह ठाकुर, दून से राम कुमार, पालमपुर से आशीष बुटेल और बैजनाथ से किशोरी लाल को CPS बना रखा है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि सभी CPS लाभ के पदों पर तैनात है। इन्हें प्रतिमाह 2,20,000 रुपए बतौर वेतन और भत्ते के रूप में अदा किया जाता है।

याचिका में हिमाचल संसदीय सचिव (नियुक्ति, वेतन, भत्ते, शक्तियां, विशेषाधिकार और सुविधाएं) अधिनियम, 2006 को निरस्त करने की गुहार लगाई गई है। याचिका में आरोप है कि CPS की नियुक्ति कानून के प्रावधानों के विपरीत है। यह लोग मंत्रियों के बराबर वेतन व अन्य सुविधाएं ले रहे हैं।

इन्होंने दी डिप्टी CM व CPS को चुनौती

हिमाचल में डिप्टी सीएम व CPS को BJP के 11 विधायकों, पीपल फॉर रिस्पांसिबल गवर्नेंस संस्था तथा कल्पना नाम की एक महिला ने हाईकोर्ट में याचिका डालकर चुनौती दी है। याचिका में CPS की नियुक्ति को असंवैधानिक बताया गया है।

सुप्रीम कोर्ट पहुंची हिमाचल सरकार

इस बीच राज्य सरकार CPS केस को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। हिमाचल सरकार ने हाईकोर्ट से इस केस को सुप्रीम कोर्ट के लिए ट्रांसफर करने की पिटीशन डाली है। इस पर बीते शुक्रवार को सुनवाई होनी थी। मगर, सरकार के वकील अभिषेक मनु सिंघवी के उपस्थित नहीं होने की वजह से यह केस आज नहीं सुना जा सका। अब सुप्रीम कोर्ट में इसी मामले में अगले हफ्ते सुनवाई हो सकती है।

डिप्टी सीएम व CPS को व्यक्तिगत तौर पर प्रतिवादी बनाया

कोर्ट ने याचिकाकर्ता की अपील पर डिप्टी सीएम और CPS को व्यक्तिगत तौर प्रतिवादी बनाया है। याचिका में दलील दी गई कि हिमाचल और असम संसदीय सचिव की नियुक्ति के लिए बनाए गए अधिनियम एक जैसे हैं। आरोप लगाया गया कि सरकार को यह पता है कि सुप्रीम कोर्ट ने असम और मणिपुर में संसदीय सचिव की नियुक्ति के लिए बनाए गए अधिनियम को गैर कानूनी ठहराया है। बावजूद इसके हिमाचल सरकार ने CPS की नियुक्ति की है।

15 फीसदी से ज्यादा नहीं हो सकती मंत्रियों की संख्या

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164 में किए गए संशोधन के मुताबिक किसी भी प्रदेश में मंत्रियों की संख्या विधायकों की कुल संख्या का 15 फीसदी से अधिक नहीं हो सकती। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, प्रदेश में मंत्री और CPS की संख्या में 15 फीसदी से ज्यादा हो गई है।