आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : 5 राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव के बाद हरियाणा में भी राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) पदाधिकारियों की संघ नेताओं की कई महत्वपूर्ण बैठकों और CM मनोहर लाल की सूबे के गवर्नर से मुलाकात के बाद मंत्रिमंडल में फेरबदल की चर्चाएं काफी तेज हो गई हैं। सरकार में मंत्रिमंडल में फेरबदल की तैयारी की 4 बड़ी वजह बताई जा रही हैं।
पहली वजह तो अनिल विज और CMO के विवाद को माना जा रहा है। इसके साथ ही सरकार में सहयोगी जननायक जनता पार्टी (JJP) से किनारा करने को लेकर भी बहाने की तलाश कर रही है।
कई मंत्रियों के विभागों में कामकाज को लेकर भी केंद्रीय नेतृत्व एतराज जता चुका है, जिसके बाद सीएम मनोहर इनके विभागों में बदला कर अपने पास रख सकते हैं। इसके साथ ही कुछ निर्दलीय विधायकों को साधना भी सरकार की मजबूरी बना हुआ है।
बड़े विभागों को CM खुद देखेंगे
सियासी गलियारों में यह माना जा रहा है कि भाजपा एकदम से JJP से किनारा नहीं करेगी, लेकिन यदि सीएम मनोहर लाल अब मंत्रिमंडल का विस्तार करते हैं तो संभावना है कि जेजेपी विधायकों को मिले विभागों पर वह कैंची चला सकते हैं। यह भी कहा जा रहा है डिप्टी सीएम से भी कुछ बड़े महकमे सीएम वापस ले सकते हैं, इसे जजपा ने अगर बर्दाश्त कर लिया तो ठीक वर्ना दोनों पार्टियों के रास्ते अलग होने की संभावना है।
स्वास्थ्य की जगह विज को खेल देने की तैयारी
गृह एवं स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज पिछले कुछ दिनों से नाराज चल रहे हैं। उनकी नाराजगी की वजह CMO के उनके हेल्थ डिपार्टमेंट में दखल को बताया जा रहा है। यही कारण है कि वह पिछले दो महीने से स्वास्थ्य विभाग का कामकाज नहीं देख रहे हैं। इसको लेकर सीएम के साथ उनकी मीटिंग भी हो चुकी है। विज ने यह भी कह दिया है कि वह 15 दिसंबर को शुरू हो रहे विधानसभा सत्र में विभाग से जुड़े सवालों का जवाब भी नहीं देंगे। ऐसे में अब उनसे हेल्थ वापस लेकर खेल विभाग दिए जाने के पूरे आसार हैं।
निर्दलीय विधायकों को साधना सरकार की मजबूरी
हरियाणा में जजपा के साथ 7 निर्दलीय विधायक सरकार में अपना समर्थन दे रहे हैं। ये विधायक लगातार पार्टी प्रभारी बिप्लब देब और सीएम मनोहर लाल से मिल रहे हैं। पिछले दो दिनों में भी सीएम और पार्टी प्रभारी के साथ निर्दलीय विधायक संपर्क बनाए हुए हैं।
वह लगातार दबाव बना रहे हैं कि जजपा से गठबंधन तोड़कर सरकार में उन्हें शामिल करें। हालांकि अभी तक इस पर कोई फैसला नहीं हो पाया है, लेकिन पांच राज्यों के चुनाव के बाद भाजपा हरियाणा में नए चेहरों की तलाश में जुट गई है।