आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : मप्र के नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग की सरकारी वेबसाइट ई-नगरपालिका पर हुए अटैक के मामले पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मप्र सरकार पर निशाना साधा है। सिंघार ने ट्वीट कर लिखा – कहीं ये भाजपा सरकार में हुए घोटालों एवं भ्रष्टाचारों को छिपाने के लिए “सतपुड़ा मॉडल” का दूसरा संस्करण तो नहीं ई- नगरपालिका पोर्टल मामला?

उमंग ने ट्वीट कर आगे लिखा- जैसा कि आप सबको विदित ही है कि गत 21 दिसंबर को कथित साइबर अपराधियों ने मध्यप्रदेश में ई- नगरपालिका पोर्टल के डाटा को हैक कर लिया था और लगभग तीन हफ़्ते बीत जाने के बाद भी अब तक व्यवस्थाएं सुचारू रूप से चालू नहीं हो पाई हैं। इस साइबर अटैक से पूरे प्रदेश की 413 नगर पालिकाओं के डाटा को नुकसान पहुंचा है, सिर्फ ऑफलाइन और बैकअप डाटा ही अभी तथाकथित रूप से बचाया गया है |

प्रॉपर्टी, सीवरेज, जल कर, मैरिज सर्टिफिकेट, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र जैसे तमाम काम अभी पूरी तरह से पटरी पर नहीं आ पाए हैं। यही नहीं ई- नगर पालिका के बाद नेशनल हेल्थ मिशन का डाटा भी हैक होने की बात सामने आ रही है। इन सब के बदले हैकर्स द्वारा करोड़ों रुपए मांगे जाने की बात भी सामने आ रही है। उपरोक्त साइबर हमले की समीक्षा में पाया गया है कि समूची व्यवस्था में गंभीर खामियां थीं, मसलन 215 करोड़ रुपए की लागत से तैयार पोर्टल को 11 साल पुराने सिस्टम से ऑपरेट किया जा रहा था। इसके साथ ही नगरीय प्रशासन विभाग ने 50 लाख से ज्यादा प्रॉपर्टीज के डाटा के डिजिटलाइजेशन में भी गंभीर लापरवाही बरती।

जिस ई- नगर पालिका पोर्टल को हैक किया गया था, बैकअप डाटा भी उसी के सर्वर पर लोड किया गया था। यह डिजास्टर मैनेजमेंट प्रोटोकॉल का अक्षम्य उल्लंघन था। यह बात भी सामने आई कि विभाग ने अपने पोर्टल का री- ऑडिट तक नहीं कराया था और इस गंभीर लापरवाही के बारे में जब पूछा गया तो विभाग ने हास्यास्पद और बचकाना तर्क देते हुए बताया कि उन्होंने वर्ष- 2022 में ऑडिट के लिए मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन को पत्र लिखा था लेकिन चूंकि कार्पोरेशन के पास आवश्यक तकनीक से ऑडिट करने के विशेषज्ञ ही मौजूद नहीं थे, इसलिए ऑडिट नहीं हो पाया था। गौरतलब है कि पोर्टल पर हुआ यह रैनसमवेयर अटैक देश के बाहर से हुआ था, जिसमें कभी नीदरलैंड के आईपी एड्रेस की बात कही जा रही है, तो कभी मॉरीशस, अफ़ग़ानिस्तान और इंडोनेशिया के हैकर्स की बात कही जा रही है। नगरीय प्रशासन विभाग हर साल ऑनलाइन पेमेंट के जरिए 1200 करोड़ रुपए का राजस्व इकट्ठा करता है जिसके के प्रति प्रदेश की भाजपा सरकार ने गंभीर लापरवाही बरती है, जो पूरी तरह से निंदनीय और अक्षम्य है।

*समूचे मामले में कुछ प्रश्न जो एक जागरूक विपक्षी दल के नेता की हैसियत से मेरे मन में स्वाभाविक रूप से उभरते हैं….

  1. उनमें पहला प्रश्न यह है कि केंद्र के द्वारा जारी चेतावनियों के बाद भी समूचे मामले में गंभीर लापरवाही क्यों बरती गई?*
  2. डाटा और उसके बैकअप को एक ही सर्वर पर क्यों रखा गया?*
  3. क्या मध्यप्रदेश की सरकार अपने डाटा और अपने संचालन तंत्र की गोपनीयता कायम रखने और उसकी सुरक्षा करने में सक्षम नहीं है?*
  4. इस संदेहास्पद कांड में प्रदेश सरकार आंकड़ों के सुरक्षित होने की बात तो कह रही है लेकिन जनता के मन में इस बात को लेकर संदेह की स्थिति है, समूचे मामले की अविलंब न्यायिक जांच होनी चाहिए और जांच के उपरांत यह सामने आना चाहिए कि वास्तव में कितना डाटा सुरक्षित है और कितना व कौन-कौन सा डाटा चोरी हुआ है?*
  5. जनता यह जानने को भी उत्सुक है कि कहीं यह समूचा मामला पिछली सरकार में हुए बड़े-बड़े कांडों, घोटालों या भ्रष्टाचारों को छिपाने के “सतपुड़ा मॉडल” का दूसरा संस्करण तो नहीं है?