सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क – आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : ब्रिटिश सेना में एक अलग सिख रेजिमेंट की मांग एक बार फिर ज़ोर पकड़ रही है। लेबर पार्टी के लॉर्ड कुलदीप सिंह सहोता ने 7 जुलाई को हाउस ऑफ लॉर्ड्स में यह मुद्दा उठाया। इसके बाद ब्रिटेन के रक्षा मंत्री वर्नोन रॉडनी कोकर ने 28 जुलाई को इस प्रस्ताव पर विचार करने की बात कही है।
लॉर्ड सहोता ने विश्व युद्धों में सिख सैनिकों के अद्वितीय योगदान और निष्ठा का हवाला देते हुए ब्रिटिश सेना में सिखों के लिए एक अलग रेजिमेंट की आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा कि यह न केवल उनके ऐतिहासिक बलिदान को मान्यता देगा, बल्कि वर्तमान और भविष्य के सिख युवाओं को भी प्रेरित करेगा।
सिख सैनिकों की संख्या और योगदान
यूके डिफेंस जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, 2019 में ब्रिटिश सेना में लगभग 130 सिख सैनिक थे, जो 2024 में बढ़कर करीब 160 हो गए। द्वितीय विश्व युद्ध में करीब 3 लाख सिख सैनिकों ने सेवाएं दी थीं, जबकि प्रथम विश्व युद्ध में यह संख्या एक लाख से अधिक थी।
दूसरे विश्व युद्ध में जापान की हार के मौके पर 15 अगस्त को मनाए जाने वाले VJ Day पर रक्षा मंत्री कोकर ने सिखों के योगदान को याद करने की बात कही है।
इतिहास में भी रही है सिख रेजिमेंट की चर्चा
यह मांग नई नहीं है। 2015 में तत्कालीन रक्षा मंत्री मार्क फ्रांस्वा और पूर्व मंत्री सर निकोलस सोम्स ने भी सिख रेजिमेंट की वकालत की थी। उस वक्त भी यह प्रस्ताव सेना प्रमुख के पास विचाराधीन था, लेकिन ठोस निर्णय नहीं लिया गया।
ब्रिटिश सेना में सिखों का इतिहास
सिख समुदाय का ब्रिटिश सेना से जुड़ाव 1849 से शुरू हुआ था, जब पंजाब ब्रिटिश साम्राज्य के अधीन आया। इसके बाद से सिखों को “मार्शल रेस” माना गया और बड़ी संख्या में सेना में भर्ती किया गया। 1857 के विद्रोह के बाद ब्रिटिश अधिकारियों ने सिखों को भरोसेमंद मानकर अधिक भर्ती की।
निष्कर्ष:
ब्रिटेन में सिख समुदाय लंबे समय से एक अलग सिख रेजिमेंट की मांग कर रहा है। अब जबकि यह मुद्दा संसद में फिर उठाया गया है और सरकार विचार के लिए तैयार दिख रही है, उम्मीद की जा रही है कि यह ऐतिहासिक निर्णय जल्द अमल में आ सकता है।
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