आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि सरकार किसी फैसले में कमी को दूर करने के लिए नया नियम बना सकती है, लेकिन उसे खारिज नहीं कर सकती है।
एक मीडिया हाउस के कार्यक्रम में शनिवार को CJI ने कोर्ट और कानून से जुड़े मुद्दों पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि जज जब किसी मामले में फैसला देते हैं तो वो ये नहीं सोचते कि समाज और लोग कैसा रिएक्शन देंगे। एक इलेक्टेड गवर्नमेंट और ज्यूडीशरी में यही अंतर होता है।
साथ ही, CJI ने ज्यूडीशरी सिस्टम में महिलाओं के समान मौके देने और ज्यूडीशियल सिस्टम के प्रवेश स्तर पर स्ट्रक्चरल दिक्कतें होने की बात कही। उन्होंने कहा कि हमें इन्क्लुसिव सेंस में योग्यता को फिर से डिफाइन करने की जरुरत है। यदि सभी को समान अवसर मिलेंगे तो और भी महिलाएं ज्यूडीशरी में आएंगी।
जज संवैधानिक नैतिकता से बंधे, समाजिक से नहीं: CJI
CJI ने कहा कि यदि कोई आदेश किसी कानून में कमी या किसी मुद्दे को तय करता है तो इस में सरकार को छूट होती है कि उस कमी को दूर करने के लिए वो नया कानून बनाए।
सरकार ये कभी नहीं कह सकती है कि कोई फैसला गलत है तो हम इसे खारिज करते हैं। सराकर कभी किसी फैसले को खारिज नहीं कर सकती है।
उन्होंने कहा कि किसी मामले में फैसला करने के दौरान जज संवैधानिक नैतिकता में बंधे होते है न कि समाजिक नैतिकता में।
हमने इस साल लगभग 72 हजार मामलों में फैसले दिए हैं और अभी डेढ़ महीने और हैं।
वर्ल्ड कप के लिए क्रिकेट टीम को शुभकामना
CJI ने भारतीय क्रिकेट टीम को वर्ल्ड कप के लिए शुभकामनाएं दी और उन्होंने कहा कि भारत की क्रिकेट टीम मुझे प्रेरणा देती है।
CJI ने कहा कि क्रिकेट टीम की मेंटल और फिजिकल फिटनेस के कमीटमेंट और इसे बनाए रखने के लिए मैं उनकी तारीफ करता हूं। केवल मेल टीम ही नहीं, फिमेल टीम भी ऐसा करती है।
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