सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : शिक्षक के तबादले पर रो पड़े बच्चे, 19 साल से पढ़ा रहे थे

नई दिल्ली। शिक्षक और विद्यार्थियों के बीच का रिश्ता केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं होता, बल्कि समय के साथ उसमें अपनापन और भावनात्मक जुड़ाव भी बन जाता है। इसकी मिसाल उस समय देखने को मिली, जब शिक्षक नरेंद्र खन्ना के तबादले की खबर सुनकर स्कूल के बच्चे फूट-फूटकर रोने लगे। करीब 19 वर्षों से बच्चों को पढ़ा रहे शिक्षक के जाने की बात विद्यार्थियों के लिए बेहद भावुक कर देने वाली थी। बच्चे उनसे स्कूल नहीं छोड़ने की गुहार लगाते नजर आए।

‘सर, मत जाइए…’ कहकर रोने लगे बच्चे तबादले की खबर सामने आने के बाद विद्यार्थियों को अपने प्रिय शिक्षक से बिछड़ने का डर सताने लगा। कई बच्चे भावुक होकर उनसे रुकने की अपील करने लगे। उनके आंसुओं और शिक्षक के प्रति लगाव ने वहां मौजूद लोगों को भी भावुक कर दिया। यह घटना बताती है कि लंबे समय तक एक ही विद्यालय में पढ़ाने वाले शिक्षक विद्यार्थियों के जीवन में कितनी महत्वपूर्ण जगह बना लेते हैं।

19 वर्षों की सेवा ने बनाया खास रिश्ता नरेंद्र खन्ना लगभग 19 साल से बच्चों को शिक्षा दे रहे थे। इतने लंबे समय में उन्होंने विद्यार्थियों को पढ़ाने के साथ-साथ उनके व्यक्तित्व और सीखने की प्रक्रिया में भी योगदान दिया। नियमित कक्षाओं, मार्गदर्शन और बच्चों के साथ लगातार संवाद से शिक्षक और विद्यार्थियों के बीच विश्वास का रिश्ता बनता है। यही वजह रही कि उनके तबादले की खबर बच्चों के लिए भावनात्मक पल बन गई।

शिक्षक का महत्व केवल किताबों तक नहीं शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षक की भूमिका पाठ्यक्रम पूरा कराने से कहीं अधिक होती है। वे बच्चों को अनुशासन, आत्मविश्वास और जीवन के मूल्यों को समझने में भी मदद करते हैं। विद्यार्थियों का इस तरह भावुक होना उनके शिक्षक के प्रति सम्मान और लगाव को दर्शाता है। हालांकि, तबादला सरकारी सेवा व्यवस्था का हिस्सा है और इसका उद्देश्य प्रशासनिक जरूरतों के अनुसार शिक्षकों की तैनाती करना होता है। ऐसी घटनाएं यह भी याद दिलाती हैं कि विद्यालयों में स्थिरता, शिक्षकों का विद्यार्थियों से जुड़ाव और बच्चों की भावनात्मक जरूरतें शिक्षा व्यवस्था के महत्वपूर्ण पहलू हैं।


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