सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल ने दुनिया भर में रोजगार के भविष्य को लेकर नई बहस छेड़ दी है। खास तौर पर व्हाइट-कॉलर यानी दफ्तरों में किए जाने वाले पेशेवर और ज्ञान-आधारित कामों पर इसका प्रभाव दिखाई देने लगा है। लेखन, आंकड़ों का विश्लेषण, ग्राहक सेवा, लेखांकन, विपणन और सॉफ्टवेयर विकास जैसे क्षेत्रों में एआई आधारित उपकरण कई काम तेजी से करने में सक्षम हो रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या आने वाले समय में नौकरियां खत्म हो जाएंगी या काम करने के तरीके में बड़ा बदलाव आएगा।
काम करने के तरीकों में बदलाव एआई आधारित तकनीक दस्तावेज तैयार करने, जानकारी का सार निकालने, आंकड़ों का विश्लेषण करने और नियमित प्रशासनिक कार्यों को स्वचालित बनाने में मदद कर रही है। इससे कंपनियों को कुछ कार्य कम समय में पूरे करने का अवसर मिलता है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि हर पेशे में कर्मचारियों की जरूरत समाप्त हो जाएगी। कई मामलों में एआई कर्मचारियों की जगह लेने के बजाय उनकी कार्यक्षमता बढ़ाने वाले उपकरण के रूप में इस्तेमाल हो रहा है।
किन नौकरियों पर पड़ सकता है अधिक असर? नियमित और दोहराए जाने वाले कार्यों से जुड़ी नौकरियों पर स्वचालन का दबाव अधिक हो सकता है। इनमें सामान्य ग्राहक सहायता, प्रारंभिक स्तर के प्रशासनिक कार्य, दस्तावेजों की छंटाई और बुनियादी आंकड़ा प्रसंस्करण शामिल हैं। हाल की एक रिपोर्ट में भारत में कॉल सेंटर क्षेत्र में एआई के कारण शुरुआती स्तर की नौकरियों पर दबाव के संकेत भी बताए गए हैं। हालांकि, नौकरी में बदलाव के पीछे आर्थिक परिस्थितियां और कंपनियों की भर्ती नीतियां भी जिम्मेदार हो सकती हैं।
भारत में रोजगार की बदलती तस्वीर भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार से जुड़ी हालिया रिपोर्टिंग के अनुसार, देश के लगभग एक-चौथाई कार्यबल के काम ऐसे क्षेत्रों में हैं, जिन पर एआई का प्रभाव पड़ सकता है। इसका मतलब यह नहीं है कि इन सभी लोगों की नौकरियां चली जाएंगी। कई पेशों में एआई उत्पादकता बढ़ाने और कर्मचारियों को अधिक जटिल काम करने में मदद कर सकता है।
भविष्य में किन कौशलों की होगी मांग? विशेषज्ञों के अनुसार, एआई उपकरणों का उपयोग करना, आंकड़ों को समझना, समस्या का समाधान करना, रचनात्मक सोच, संवाद कौशल और निर्णय लेने की क्षमता रोजगार के लिहाज से महत्वपूर्ण होते जाएंगे। कंपनियों को ऐसे कर्मचारियों की जरूरत बनी रह सकती है, जो तकनीक से मिले परिणामों की जांच कर सकें और जिम्मेदारी के साथ उनका उपयोग करें। इसलिए एआई को केवल नौकरी छीनने वाली तकनीक के रूप में देखना सही नहीं होगा। कुछ काम और पद कम हो सकते हैं, जबकि नए कौशल और भूमिकाओं की मांग बढ़ सकती है। भविष्य में रोजगार के अवसर इस बात पर भी निर्भर करेंगे कि कर्मचारी, कंपनियां और शैक्षणिक संस्थान बदलती तकनीक के अनुरूप खुद को कितनी तेजी से तैयार करते हैं।
Hashtags: #Education #Bhopal #एआई #बदल #एनएन #टवर #आईट #बहस #इसक #क्याखत्महोंगीनौकरियां