आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : लोक आस्था के महापर्व छठ के चौथे दिन आज व्रतियों ने उगते सूर्य को अर्घ्य दिया। इसके साथ ही 36 घंटे का निर्जला उपवास समाप्त हुआ। सुबह से ही घाटों पर व्रती उगते सूर्य को अर्घ्य देने के लिए खड़े दिखे। अर्घ्य के दौरान छठ व्रती पानी में खड़े हुए। इसके बाद फल और प्रसाद से भरा दउरा-सूप लेकर भगवान भास्कर की उपासना की। भगवान भास्कर को अर्घ्य देने के बाद व्रतियों ने छठ का प्रसाद खाया और व्रत खोला।

सबसे पहले घाटों पर अर्घ्य की तस्वीरें देखिए..

मुख्यमंत्री ने अपने आवास पर छठ का अर्घ्य दिया।

केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे सिर पर डाल लेकर छठ घाट पहुंचे।

उगते सूर्य को अर्घ्य देती छठ व्रती।

अर्घ्य के लिए उगते सूर्य का इंतजार करतीं महिलाएं।

उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ 4 दिन का छठ महापर्व संपन्न हुआ।

हाथ में सूप लेकर सूर्य के उगने का इंतजार करतीं व्रती।

सुबह से ही छठ घाटों पर लोगों की भीड़ देखने को मिली। घाटों को विशेष रूप से सजाया गया था। अर्घ्य के दौरान छठ के गीत बजते रहे।

बेतिया के ऐतिहासिक संत घाट पर अर्घ्य का इंतजार करते व्रती।

कटिहार के कोसी नदी घाट पर सूर्य का इंतजार करते व्रती।

17 नवंबर को नहाय खाय के साथ छठ महापर्व की शुरुआत हुई थी। 18 को खरना था। 19 नवंबर को व्रतियों ने डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया।

शनिवार को छठ व्रतियों ने डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया।

दानापुर फक्कड़ महतो घाट पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़।

धनिष्ठा नक्षत्र और ध्रुव योग का शुभ संयोग

आचार्य राकेश झा ने बताया कि छठ महापर्व पर ग्रह-गोचरों का शुभ संयोग बन रहा है। उदीयमान सूर्य को अर्घ्य पर धनिष्ठा नक्षत्र और ध्रुव योग का शुभ संयोग रहेगा। सूर्य की शक्ति का मुख्य स्त्रोत उनकी पत्नी उषा और प्रत्युषा हैं।

छठ में सूर्य के साथ दोनों शक्तियों की संयुक्त आराधना होती है। पहले सायंकालीन अर्घ्य में सूर्य की अंतिम किरण प्रत्युषा और फिर उदयमान सूर्य की पहली किरण उषा को अर्घ्य देकर नमन किया जाता है।

सूर्य को अर्घ्य देने से कई जन्मों के पाप होते हैं नष्ट

भगवान भास्कर को अर्घ्य देने से कई जन्मों के पाप नष्ट होते हैं। लाल चंदन, फूल के साथ अर्घ्य से यश की प्राप्ति होती है। प्रातःकाल में जल में रक्त चंदन, लाल फूल, इत्र के साथ ताम्रपात्र में आरोग्य के देवता सूर्य को अर्घ्य देने से आयु, विद्या, यश और बल की प्राप्ति होती है।

स्थिर एवं महालक्ष्मी की प्राप्ति के लिए सूर्य को दूध का अर्घ्य देना चाहिए। सूर्य देवता को जल से अर्घ्य देने से मानसिक शांति और जीवन में उन्नति होती है।

आरोग्यता के लिए उत्तम है छठ व्रत

ज्योतिषी राकेश झा के अनुसार सूर्य षष्ठी का व्रत आरोग्यता, सौभाग्य व संतान के लिए किया जाता है। स्कंद पुराण के मुताबिक राजा प्रियव्रत ने भी यह व्रत रखा था। उन्हें कुष्ठ रोग हो गया था।

भगवान भास्कर से इस रोग की मुक्ति के लिए उन्होंने छठ व्रत किया था। स्कंद पुराण में प्रतिहार षष्ठी के तौर पर इस व्रत की चर्चा है। वर्षकृत्यम में भी छठ की चर्चा है।