सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : पंजाब के मानसा में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने जांच अपने हाथ में ले ली है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर से झोटा के परिवार को निष्पक्ष और गहन जांच का भरोसा दिए जाने के बाद सीबीआई की टीम मानसा पहुंची और स्थानीय पुलिस से मामले से जुड़े दस्तावेज तथा अन्य साक्ष्य अपने कब्जे में लिए। 21 अक्टूबर 2026 को जांच एजेंसी ने मामले में प्राथमिकी दर्ज कर स्वतंत्र जांच शुरू करने की जानकारी सामने आई।
13 अक्टूबर को हुई थी झोटा की हत्या परविंदर सिंह झोटा नशे के खिलाफ अभियान से जुड़े थे और कथित तौर पर मेडिकल स्टोरों पर नशीले पदार्थों की बिक्री का विरोध कर रहे थे। 13 अक्टूबर को मानसा में एक मेडिकल स्टोर के मालिक अश्वनी कुमार के साथ उनका विवाद हुआ। इसी दौरान गोली चलने से झोटा की मौत हो गई। घटना के समय वह फेसबुक पर लाइव प्रसारण कर रहे थे। मामले में आरोपी मेडिकल स्टोर मालिक को राजस्थान से गिरफ्तार किया गया था।
अमित शाह के आश्वासन के बाद तेज हुई कार्रवाई केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पंजाब दौरे के दौरान झोटा के परिवार से मुलाकात की और मामले की गहन जांच का भरोसा दिया। परिवार और प्रदर्शन कर रहे लोगों की प्रमुख मांग थी कि हत्या की जांच पंजाब पुलिस के बजाय सीबीआई से कराई जाए। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की घोषणा की थी। इसके बाद केंद्रीय एजेंसी ने औपचारिक प्रक्रिया पूरी कर जांच शुरू की।
नशे के नेटवर्क और पुलिस की भूमिका की भी जांच सीबीआई की जांच केवल हत्या की घटना तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। एजेंसी यह भी पता लगाने का प्रयास करेगी कि प्रतिबंधित मन:प्रभावी पदार्थों की कथित बिक्री के पीछे कौन लोग या नेटवर्क सक्रिय थे। इसके साथ ही आरोपी के संपर्कों, घटना से पहले की गतिविधियों और मामले में किसी पुलिस अधिकारी या कर्मचारी की संभावित भूमिका की भी जांच की जा सकती है। जांच एजेंसी परिवार के सदस्यों के बयान दर्ज करने, घटनास्थल का निरीक्षण करने और उपलब्ध डिजिटल तथा फॉरेंसिक साक्ष्यों की पड़ताल करने की प्रक्रिया में जुटी है। जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
परिवार का विरोध और न्याय की मांग झोटा की हत्या के बाद परिवार और स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया था। परिवार ने पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार को लेकर भी आपत्ति जताई तथा सीबीआई जांच की मांग पर जोर दिया। इस मामले ने पंजाब में नशीले पदार्थों की कथित अवैध बिक्री और नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों की सुरक्षा को लेकर व्यापक चर्चा पैदा की है। अब सीबीआई की जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि हत्या के पीछे केवल व्यक्तिगत विवाद था या इसके साथ किसी बड़े आपराधिक नेटवर्क अथवा अन्य लोगों का संबंध भी सामने आता है। हालांकि, इन संभावित कड़ियों की पुष्टि जांच पूरी होने और साक्ष्यों के आधार पर ही हो सकेगी।
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