सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : कलकत्ता हाईकोर्ट ने आगामी पश्चिम बंगाल उपचुनावों के लिए नवगठित Democratic Trinamool Congress (DTC) को ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न आवंटित करने के निर्वाचन आयोग के फैसले को चुनौती देने वाली Indian Secular Front (ISF) की याचिका खारिज कर दी है। जस्टिस कृष्ण राव ने 30 सितंबर को यह याचिका खारिज की।

विधायक नौशाद सिद्दीकी के नेतृत्व वाली ISF ने आयोग की ओर से उसे लिफाफा चिह्न के बजाय ‘अलमारी’ चिह्न दिए जाने के बाद अदालत का रुख किया था। पार्टी की दलील थी कि उसने 2024 लोकसभा चुनाव और 2026 विधानसभा चुनाव लिफाफा चिह्न पर लड़े थे, इसलिए यह चिह्न किसी दूसरी पार्टी को देने से मतदाताओं में भ्रम की स्थिति बन सकती है।

विवाद 6 अक्टूबर को नंदीग्राम और रेजीनगर में होने वाले उपचुनावों से जुड़ा है। लिफाफा चिह्न ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाली DTC को आवंटित किया गया है, जबकि ISF अब अलमारी चिह्न पर चुनाव लड़ेगी।

सुनवाई के दौरान निर्वाचन आयोग ने कहा कि लिफाफा एक मुक्त चुनाव चिह्न है और पहले ISF को इसका आवंटन केवल खास चुनावों तक सीमित था। आयोग ने यह भी दलील दी कि ISF पंजीकृत लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल है, इसलिए किसी मुक्त चिह्न पर उसका स्थायी अधिकार नहीं बनता।

पहले की सुनवाइयों में हाईकोर्ट ने आयोग के फैसले पर सवाल उठाए थे, जिनमें यह भी शामिल था कि जब ISF ने भी यही चिह्न मांगा था तो उसे किसी अन्य दल को क्यों दिया गया। हालांकि, अदालत ने अंततः चुनाव चिह्न आवंटन में हस्तक्षेप करने से इनकार किया और ISF की याचिका खारिज कर दी।

इस फैसले के बाद नंदीग्राम उपचुनाव में DTC लिफाफा चिह्न बरकरार रखेगी, जबकि ISF अलमारी चिह्न का इस्तेमाल करेगी। यह आदेश 6 अक्टूबर को होने वाले पश्चिम बंगाल विधानसभा उपचुनावों से पहले आया है।


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