सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल: ब्रिटेन में 2023 में सबसे अधिक 2 लाख 50 हजार भारतीय पहुंचे। इसमें से 1 लाख 27 हजार लोग काम के सिलसिले में गए। इसके अलावा 1 लाख 15 हजार लोग पढ़ने और 9 हजार लोग अन्य कारणों से ब्रिटेन पहुंचे।

भारतीयों के बाद दूसरे नंबर पर नाइजीरियाई (1 लाख 41 हजार), तीसरे पर चीनी (90 हजार) और चौथे पर पाकिस्तानी (83 हजार) रहे।

2023 में कुल 3 लाख 37 हजार लोगों को काम करने के लिए वर्क वीजा मिला। इनमें से 18 हजार भारतीयों को केयर वर्कर वीजा मिला, जिसमें से 11 हजार नर्स वीजा थे। 1 लाख 14 हजार लोगों को ग्रेजुएशन वीजा दिया गया। इनमें 50 हजार भारतीयों को यह वीजा मिला। इसके तहत भारतीय पढ़ाई के बाद वहां नौकरी कर सकते हैं यानी उन्हें अलग से वर्क वीजा की जरूरत नहीं होगी।

वही, मास्टर्स के लिए भारतीय नागरिकों को जारी किए गए वीजा में कमी आई है। पिछले साल की तुलना में मार्च 2024 में 21,800 भारतीय छात्र मास्टर डिग्री के लिए ब्रिटेन आए।

ब्रिटेन में सबसे ज्यादा भारतीय काम के सिलसिले में पहुंचते हैं।

ब्रिटेन जाने वालों की संख्या कम हुई

नेशनल स्टेटिक डिपार्टमेंट के मुताबिक, ब्रिटेन जाने वाले लोगों में एक साल के अंदर ही 10% कमी आई हैं। 2023 में 6 लाख 85 हजार लोग ब्रिटेन पहुंचे, यह संख्या 2022 में सबसे ज्यादा 7 लाख 64 हजार थी।

नौकरी के लिए ब्रिटेन जाने वाले गैर यूरोपीय लोगों की संख्या बढ़ी

ब्रिटेन जाने वाले लोगों में 85% गैर यूरोपीय हैं। 2021 तक ये लोग काम से ज्यादा पढ़ने के लिए वहां जाते थे। लेकिन, 2023 के डेटा के मुताबिक गैर यूरोपीय लोग पढ़ाई से ज्यादा नौकरी के लिए ब्रिटेन पहुंचे।

2023 में रोजगार की तलाश में 4 लाख 23 हजार गैर यूरोपीय लोग ब्रिटेन पहुंचे, जबकि उससे पिछले साल यही संख्या 2 लाख 77 हजार थी। यानी पिछले एक साल में 53% की बढ़त देखी गई है। 2023 में 2 लाख 19 हजार लोगों ने कम समय के लिए और 2 लाख 4 हजार लोगों ने लंबे समय के लिए ब्रिटेन में रहने के लिए एप्लिकेशन दी थी।

ब्रिटेन में गैर यूरोपीय लोग कम समय के लिए रहना चाहते हैं। वहीं, लंबे समय तक रहने वाले ज्यादातर लोग हेल्थ कारणों के चलते वहां रहना चाहते हैं। 2023 में वर्क वीजा वालों पर आश्रित 2 लाख 79 हजार लोगों को वीजा मिला।

83 हजार भारतीयों ने ब्रिटेन की नागरिकता ली

पिछले पांच साल में 83 हजार 468 भारतीयों ने भारत की नागरिकता को छोड़कर ब्रिटेन की सिटिजनशिप ली है। यूरोप के किसी भी देश में ये सर्वाधिक है। इससे पहले 2022 तक गोल्डन वीजा स्कीम के तहत 254 भारतीय धनकुबेरों ने ब्रिटेन की नागरिकता ली थी।