सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्कआईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : ब्रिटेन में पूर्व डाकघर की संचालिका एक सिख महिला को नक्सली भेदभाव का शिकार होना पड़ा। घटना के 27 साल बाद सिख महिला ने उसके साथ हुए भेदभाव का मामला उठाया है। उसे विरासत के नाम पर जबरन जुर्म कबूलने के लिए मजबूर किया गया। लेकिन, कुलदीप कौर लड़ी। उनके विरोध के 27 साल बाद स्थानीय सरकार पुराने मामलों के लिए भी नया नियम लाने की तैयारी में है।

73 वर्षीय कुलदीप कौर अटवाल पर जुलाई 1995 से नवंबर 1996 के बीच 30 हजार पाउंड चुराने का आरोप लगाया गया था। तब उनकी उम्र 46 साल थी। वह कोवेंट्री शाखा में कार्यरत थीं। डाकघर के ऑडिटरों ने 1997 में रेड की। द गार्डियन अखबार ने दावा किया है कि उसे अपनी एशियाई विरासत के कारण भेदभाव का सामना करना पड़ा।

उसे सांस्कृति के कारण जबरन जुर्म कबूलने के लिए मजबूर किया गया। लेकिन, कुलदीप कौर अटवाल इसके लिए लड़ी और जीत भी हासिल की।

कुलदीप कौर ने अखबर को बताया कि ऑडिटरों ने उन्हें सुझाव दिया था, अगर वह अपनी गलती मानती है तो वे कठोर सजा से बच सकती है। लेकिन उन्होंने लड़ने का फैसला किया।

बार-बार कुलदीप पर डाला गया दबाव
सच के लिए शुरू हुई इस लड़ाई में कुलदीप कौर पर बार-बार दबाव बनाया गया। 1997 में शुरू हुई इस लड़ाई में कुलदीप पर ऑडिटर ने दबाव बनाते हुए कहा था कि महिलाओं पर समाज में पैसे लेने का दबाव होता है और वे परिवार को भी नहीं बताती। ऑडिटर टीम ने उनसे उन पर दबाव बनाने वाले का नाम भी पूछा था।

डाकघर ने मांगी थी माफी
सबूतों की कमी के कारण कुलदीप कौर को दोषी नहीं घोषित किया गया। तीन दिन के बाद ही कोर्ट ने उनके हक में फैसला सुना दिया। पिछले साल डाकघर ने भेदभाव के लिए माफी मांगी थी। डाकघर का एक दस्तावेज भी मिला था, जिसमें कुलदीप कौर की तरह ऑपरेटरों को नेग्रोइड प्रकार, चीनी/जापानी प्रकार और गहरे रंग की स्किन वाले यूरोपियन के रूप में बांटा गया था।

कुलदीप कौर ने बताया कि कोवेंट्री की शाखा में जिस सॉफ्टवेयर का प्रयोग किया गया था, वे मालफंग्शन था और उसमें खराबी के कारण 900 से अधिक लोगों को गलत तरीके से दोषी ठहराया गया था। डाकघर को भी इसकी जानकारी थी और इस सॉफ्टवेयर को अपग्रेड करने के लिए प्रक्रिया भी शुरू की गई।

मामले में जांच फिर से शुरू
कुलदीप कौर की जीत के बाद अब लंदन की मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने धोखाधड़ी अपराधों को लेकर डाकघर मामले में नई जांच शुरू की है। यूके सरकार ने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि वह उन सैकड़ों डाकघर प्रबंधकों की सजा को पलटने के लिए नया कानून लाएगी। जिन्हें चोरी और धोखाधड़ी के लिए गलत तरीके से दोषी ठहराया गया था।

कुलदीप कौर ने अखबर को बताया कि ऑडिटरों ने उन्हें सुझाव दिया था, अगर वह अपनी गलती मानती है तो वे कठोर सजा से बच सकती है। लेकिन उन्होंने लड़ने का फैसला किया।

बार-बार कुलदीप पर डाला गया दबाव

सच के लिए शुरू हुई इस लड़ाई में कुलदीप कौर पर बार-बार दबाव बनाया गया। 1997 में शुरू हुई इस लड़ाई में कुलदीप पर ऑडिटर ने दबाव बनाते हुए कहा था कि महिलाओं पर समाज में पैसे लेने का दबाव होता है और वे परिवार को भी नहीं बताती। ऑडिटर टीम ने उनसे उन पर दबाव बनाने वाले का नाम भी पूछा था।

डाकघर ने मांगी थी माफी

सबूतों की कमी के कारण कुलदीप कौर को दोषी नहीं घोषित किया गया। तीन दिन के बाद ही कोर्ट ने उनके हक में फैसला सुना दिया। पिछले साल डाकघर ने भेदभाव के लिए माफी मांगी थी। डाकघर का एक दस्तावेज भी मिला था, जिसमें कुलदीप कौर की तरह ऑपरेटरों को नेग्रोइड प्रकार, चीनी/जापानी प्रकार और गहरे रंग की स्किन वाले यूरोपियन के रूप में बांटा गया था।

कुलदीप कौर ने बताया कि कोवेंट्री की शाखा में जिस सॉफ्टवेयर का प्रयोग किया गया था, वे मालफंग्शन था और उसमें खराबी के कारण 900 से अधिक लोगों को गलत तरीके से दोषी ठहराया गया था। डाकघर को भी इसकी जानकारी थी और इस सॉफ्टवेयर को अपग्रेड करने के लिए प्रक्रिया भी शुरू की गई।

मामले में जांच फिर से शुरू

कुलदीप कौर की जीत के बाद अब लंदन की मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने धोखाधड़ी अपराधों को लेकर डाकघर मामले में नई जांच शुरू की है। यूके सरकार ने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि वह उन सैकड़ों डाकघर प्रबंधकों की सजा को पलटने के लिए नया कानून लाएगी। जिन्हें चोरी और धोखाधड़ी के लिए गलत तरीके से दोषी ठहराया गया था।