आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : ओडिशा के संबलपुर ज‍िले में एक नवजात बच्ची 20 फुट गहरे बोरवेल में गिर गई। उसके रोने की आवाज सुनकर फौरन बचाव अभ‍ियान शुरू किया गया। पांच घंटे के बाद मंगलवार (12 दिसंबर) की रात बच्‍ची को सुरक्षित बाहर निकाला गया।

रेस्क्यू टीम ने बताया कि बोरवेल में टेम्परेचर काफी कम था। बचाव के दौरान 100 वॉट का बल्ब डाला गया, जिसकी गर्मी से बच्ची की जान बची रही। साथ ही बताया कि बच्ची जब बोरवेल में गिरी तो वह एक प्लास्टिक की बॉटल पर अटक गई थी, जिसने उसके लिए कुशन का काम किया। बॉटल के ऊपर अटकने से वह डायरेक्ट बोरवेल के तल से नहीं टकराई और उसको गंभीर चोटें नहीं आईं।

बचाव ऑपरेशन पूरा होने के बाद बच्ची को संबलपुर के एक अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टर ने बताया कि बोरवेल से गिरी बच्ची के शरीर पर कोई कपड़ा नहीं था। बोरवेल में टेम्परेचर भी काफी कम था। इससे बच्ची का बॉडी टेम्परेचर कम हो गया था, लेकिन अब स्थिति में काफी सुधार है।

रेस्क्यू ऑपरेशन की कहानी…

संबलपुर जिले के रेंगाली के लारीपली गांव में 20 फुट गहरे बोरवेल से एक बच्ची की गांववालों को मंगलवार (12 दिसंबर) को आवाज आई। गांववालों ने तुरंत पुलिस को बताया। इसके बाद रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। गांव में मंगलवार रात को 12 डिग्री सेल्सियस तापमान था। जमीन के नीचे बोरवेल में टेम्परेचर और भी कम था।

बोरवेल में जब ऑक्सीजन स्पलाई शुरू हुई तो बच्ची ने रोना बंद कर दिया। बच्ची को गर्मी और रोशनी पहुंचाने के लिए 100 वॉट का बल्ब बोरवेल में डाला गया। इसके बाद बोरवेल में कैमरा डाला गया, जिससे बच्ची की लोकेशन का पता लगा। इसके बाद लोहे के पाइप (बोरवेल) को काटा गया और बच्ची को बाहर निकाल लिया गया। यह पूरा ऑपरेशन 5 घंटे तक चला।

अभी पता नहीं चल पाया है कि बच्ची बोरवेल में कैसे गिरी। गांववालों के मुताबिक, उसे किसी ने बोरवेल में फेंक दिया था। पुलिस का कहना है कि बच्ची लारीपली गांव की रहने वाली नहीं है। मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने भी रेस्क्यू टीम का धन्यवाद किया। पटनायक ने X पर लिखा- मैं बच्ची की लंबी आयु की कामना करता हूं।

जालंधर में बोरवेल में फंसे इंजीनियर का रेस्क्यू, हरियाणा का रहने वाला, दिल्ली-कटरा एक्सप्रेसवे पर मशीन ठीक करते समय दबा

जालंधर में दिल्ली-कटरा एक्सप्रेसवे पर फ्लाईओवर के लिए बनाए जा रहे 80 फीट गहरे बोरवेल में 24 घंटे से ज्यादा टाइम से इंजीनियर फंसा हुआ था। NDRF की टीमें रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर उसकी तलाश कर रही हैं। इंजीनियर की पहचान सुरेश (30) के रूप में हुई है। मशीनों की मदद से करीब 60 फीट तक मिट्टी की खुदाई की जा चुकी है।