सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क– इंटीग्रेटेड ट्रेड .. न्यूज़ भोपाल: भोपाल स्मारक अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र (बीएमएचआरसी) में अब बच्चों में होने वाली विभिन्न शारीरिक व मानसिक विकारों जैसे स्वाभाविक विकास में देरी, डाउन सिंड्रोम ऑटिज़्म, हाइपर एक्टिव डिसऑर्डर इन्टेलेक्चुअल डिसएबिलिटी का ऑक्युपेशनल थेरेपी के जरिए इलाज शुरू हो गया है।
इसके लिए ऑक्युपेशनल थेरेपी विभाग की अलग ओपीडी शुरू हो गई है। यह ओपीडी हर मंगलवार को सुबह 9 बजे से 4 बजे तक और शनिवार को सुबह 9 बजे से 2 बजे तक संचालित होगी। ओपीडी में बीएमएचआरसी की ऑक्युपेशनल श्रीमती पूनम बिचपुरिया गौर बिहेवियर थेरेपी, सेंसरी इंटिग्रेशन थेरेपी, न्यूरो डेवलपमेंट थेरेपी, ओरोमोटर एक्सरसाइज और विभिन्न उपचारात्मक गतिविधियों (Therapeutic activities) के जरिए मरीजों के विकारों का इलाज़ करेंगी।
बीएमएचआरसी की प्रभारी निदेशक मनीषा श्रीवास्तव ने बताया कि बीते कुछ सालों में बच्चों में न्यूरो डेवलपमेंट डिसऑर्डर जैसे ऑटिज़्म व इससे संबंधित बीमारियों के मरीजों की संख्या काफी बढ़ गई है। ऑक्युपेशनल थेरेपी इन विकारों के इलाज में काफी कारगर है। इन विकारों से पीड़ित गैस पीड़ितों के आश्रितों व अन्य मरीजों को बीएमएचआरसी में सर्वश्रेष्ठ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए ऑक्युपेशनल थेरेपी विभाग का विस्तार किया गया है। विभाग को बच्चों के अनुसार रिनोवेट किया गया है। साथ ही ऑक्युपेशनल थेरेपी के लिए आवश्यक कई अन्य उपकरण जैसे मल्टी एक्टिविटी वर्क स्टेशन, सेंसरी इक्विपमेंट्स की खरीदी भी की जा रही है।
ओपीडी के लिए निर्धारित दिनों में किसी भी मरीज का सीधे पर्चा बनवाकर या स्पेशलिस्ट से रेफर कराकर ऑक्युपेशनल थेरेपी विभाग में परामर्श लिया जा सकता है।
बीएमएचआरसी की ऑक्युपेशनल थेरेपिस्ट श्रीमती पूनम बिचपुरिया गौर ने बताया कि ऑक्युपेशनल थेरेपी जन्म के साथ या जन्म के बाद होने वाली शारीरिक व मानसिक दिव्यांगता को दूर करने में सहायक है। ओपीडी में ऐसे बच्चों, जो खुद चल नहीं पाते, बोल नहीं पाते, जिनका शारीरिक विकास ठीक से नहीं हो रहा आदि लक्षणों वाले मरीजों का आकलन कर उनका अलग—अलग तरीकों व थेरेपी के जरिए इलाज करते हैं। इन सभी तकनीकों से मरीजों के लक्षण में काफी सुधार होता है। काफी बच्चे सामान्य बच्चों की तरह व्यवहार करने लगते हैं। अगर कम उम्र में ऐसे बच्चों की थेरेपी शुरू कर दिया जाए, तो यह काफी बच्चों में कारगर है।