आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : उप मुख्यमंत्री श्री राजेंद्र शुक्ल ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय नागरिक विमानन एवं इस्पात मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से सौजन्य भेंट की। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने रीवा में निर्माणाधीन विमानतल के कार्य के संबंध में विस्तृत चर्चा की।
भोपाल गैस पीड़ितों को लेकर जबलपुर हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। गैस पीड़ितों को सही इलाज, शोध की व्यवस्था न देने, सुप्रीम कोर्ट के भोपाल गैस पीड़ितों के स्वास्थ्य के मामले में 2012 के आदेश की अवमानना करने पर केंद्र और राज्य सरकार के 9 अधिकारियों पर केस चलाने का आदेश दिया है। इस मामले में 16 जनवरी तक जवाब प्रस्तुत करने को कहा गया है। 17 जनवरी को मामले में सुनवाई होगी।
मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के जस्टिस शील नागू और देवनारायण मिश्र की खंडपीठ ने अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कदम उठाने और न्यायालय की अवमानना अधिनियम 1971 की धारा 2 के तहत मुकदमा चलाने का आदेश दिया है।
इन अधिकारियों पर कार्रवाई
भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार मंत्रालय के सचिव राजेश भूषण, भारत सरकार के रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के सचिव आरती आहूजा, भोपाल मेमोरियल अस्पताल एवं रिसर्च सेंटर के डायरेक्टर डॉ. प्रभा देसिकान, नेशनल इंस्टिट्यूट फॉर रिसर्च ऑन एनवायर्नमेंटल हेल्थ के संचालक डॉ. आरआर तिवारी, तत्कालीन मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैस, अतिरिक्त मुख्य सचिव मोहम्मद सुलेमान, राज्य सूचना अधिकारी अमरकुमार सिन्हा, एनआईसीएसआई विनोदकुमार विश्वकर्मा और आईसीएमआर भारत सरकार के सीनियर डिप्टी संचालक आर. रामा कृष्णन।
कोर्ट के आदेश का स्वागत
भोपाल ग्रुप फॉर इनफार्मेशन एन्ड एक्शन की रचना ढिंगरा ने बताया, न्यायपालिका के इस आदेश हम सभी गैस पीड़ित संगठन स्वागत करते हैं। आदेश को मिसाल बनाना चाहिए। ताकि जिन अधिकारियों की वजह से गैस पीड़ितों की स्वास्थ्य व्यवस्था की यह हालत बनी है, उन सभी को मिसालदायक सजा भी मिलनी चाहिए।
खंडपीठ द्वारा इन सभी अधिकारियों पर लगाए गए चार्ज में लिखा है, ‘सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित निगरानी समिति के जुलाई 2023 की रिपोर्ट निगरानी समिति की रिपोर्ट से यह स्पष्ट है कि 10.5 वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद आप सभी प्रतिवादियों ने सर्वोच्च न्यायालय के साथ-साथ इस न्यायालय के निर्देशों का पालन करने में कोई तत्परता या ईमानदारी नहीं दिखाई है। गैस पीड़ितों को अधर में छोड़ दिया जा रहा है। आप सभी प्रतिवादियों ने इन आदेश के अनुपालन की प्रक्रिया इतनी दिलाई की है कि आप सभी ने पीआईएल की अवधारणा को एक मजाक बना दिया है। इस न्यायालय को गैस पीड़ितों के प्रति आपकी असंवेदनशीलता को छोड़कर आपके उत्तरदाताओं की ओर से ढिलाई के पीछे कोई अच्छा कारण नहीं दिखता है’।
आज देना है उत्तर, कल सुनवाई होगी
गैस पीड़ित संगठन की ढिंगरा ने बताया कि 16 जनवरी तक सभी को न्यायालय में उत्तर प्रस्तुत करना है। इस मामले की सुनवाई 17 जनवरी को हाईकोर्ट में होगी। ढिंगरा ने बताया कि सभी को चार्ज की कॉपी दी गई है।
एनजीटी की कड़ी टिप्पणी; सीएस बिना पढ़े पक्ष रखने आए… भगवान ही मालिक
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने भोपाल के केरवा और कलियासोत डेम के बफर जोन में लगातार हो रहे अवैध निर्माण और अतिक्रमण पर सरकार की अनदेखी व लापरवाही पर कड़ी नाराजगी जताई है। एनजीटी ने इस संबंध में दिए पिछले आदेशों का पालन नहीं होने पर गुरुवार को मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैस को व्यक्तिगत रूप से सुनवाई के दौरान तलब किया। संतोषजनक जवाब नहीं दे पाने पर राज्य शासन पर 5 लाख रुपए की पेनाल्टी लगाई। एनजीटी ने सीएस से सवाल किया कि डेढ़ साल पहले ट्रिब्यूनल ने अतिक्रमण और अवैध निर्माणों पर कार्रवाई के आदेश दिए थे, इस आदेश का पालन हो सके इसके लिए आपने अभी तक क्या-क्या कदम उठाए हैं? सीएस बैस सटीक जवाब नहीं दे सके। इस पर एनजीटी ने सख्त लहजे में कहा कि ऐसे राज्य का भगवान ही मालिक है, जिसका मुख्य सचिव फाइलें देखे-पढ़े बिना ही अदालत में शासन का पक्ष रखने चला आए। क्या आपके अधीनस्थों ने भी आपको इस संबंध में कोई ब्रीफिंग नहीं दी? एनजीटी ने राज्य शासन की ओर से केरव-कलियासोत बफर में अतिक्रमण को लेकर पेश की गई रिपोर्ट पर तारीख और हस्ताक्षर नहीं होने पर लताड़ लगाई।