आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : अयोध्या में 22 जनवरी को होने वाले राममंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में बंगाल की सीएम ममता बनर्जी शामिल नहीं होंगी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तृणमूल कांग्रेस (TMC) की ओर से कार्यक्रम में कोई शिरकत नहीं करेगा। हालांकि, TMC की ओर से आधिकारिक तौर इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है।
तृणमूल कांग्रेस के नेता रामलला की प्राण प्रतिष्ठा को पॉलिटिकल इवेंट कह रहे हैं। उनका मानना है कि बीजेपी 2024 के लोकसभा चुनाव अभियान के लिए राममंदिर को एक स्प्रिंगबोर्ड की तरह इस्तेमाल करना चाहती है। इसीलिए पार्टी इस इवेंट से दूरी बना रही है।
अयोध्या में 22 जनवरी, 2024 को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होगी। यहां बन रहे तीन मंजिला राम मंदिर के फर्स्ट फ्लोर का काम करीब 70% पूरा हो गया है। फोटो सोर्स: सोशल मीडिया
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से सभी मुख्यमंत्रियों और बड़े नेताओं को निमंत्रण भेजा गया है। कार्यक्रम में कौन से नेता शामिल होंगे, यह अभी तक साफ नहीं हुआ है। चर्चा है कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और पूर्व सीएम लालू प्रसाद यादव कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगे।
डिंपल यादव बोलीं- इनवाइट किया तो जरूर जाऊंगी
समाजवादी पार्टी की नेता डिंपल यादव ने कहा कि अगर उन्हें आमंत्रित किया गया तो वे जरूरी जाएंगीं। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह हेल्थ इश्यू की वजह से इवेंट में हिस्सा नहीं लेंगे। मंदिर ट्रस्ट ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी और राहुल गांधी को भी निमंत्रण भेजा है। हालांकि, इन नेताओं ने अभी तक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए हामी नहीं भरी है।
सीताराम येचुरी ने निमंत्रण ठुकरा दिया
CPI (M) के महासचिव सीताराम येचुरी ने रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का निमंत्रण ठुकरा दिया। उन्होंने कहा- धर्म व्यक्तिगत पसंद है, जिसे राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। उनकी पार्टी ने एक्स पर पोस्ट कर धार्मिक कार्यक्रम को स्टेट स्पॉन्सर्ड इवेंट बनाने के लिए भाजपा और आरएसएस की निंदा की।
अयोध्या में 22 जनवरी, 2024 को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होगी। यहां बन रहे तीन मंजिला राम मंदिर के फर्स्ट फ्लोर का काम करीब 70% पूरा हो गया है। फोटो सोर्स: सोशल मीडिया
रामलला की प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित 6000 दिग्गज शामिल होंगे, जिनमें 4000 संत और करीब 2200 मेहमान हैं। इस दौरान छह दर्शनों (प्राचीन विद्यालयों) के शंकराचार्य और करीब 150 साधु-संत भी मौजूद रहेंगे। कार्यक्रम में करीब 25 लाख लोग शामिल हो सकते हैं।