सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क– इंटीग्रेटेड ट्रेड– न्यूज़ भोपाल: अयोध्या के श्री राम मंदिर निर्माण और श्री रामलला की मूर्तियों के प्राण प्रतिष्ठा समारोह ने दुनिया भर में आस्था एवं उमंग का वातावरण निर्मित कर दिया है। देश-विदेश के न्यूज़ एंड एंटरटेनमेंट चैनल राम मंदिर की भव्यता और दिव्यता पर चर्चा कर रहे हैं। जब बात राम मंदिर की चल रही है तो फिर रामराज का विषय भी चर्चाओं का केंद्र बन चुका है। भारत के भीतरी क्षेत्रों में ही नहीं अपितु बाहर भी शोध हो रहे हैं, कि रामराज कैसा था। क्यों भारत में बार-बार आदर्श राजसत्ता के रूप में रामराज का उदाहरण प्रस्तुत किया जाता है। क्यों भारत की और उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकारों ने अयोध्या के पुनर्निर्माण में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।
इन सभी परिदृष्यों का अवलोकन करने के पश्चात विश्व भर के लोग यह मानने लगे हैं कि भारतीयों के मन में समानता, सदाचार, परोपकार, क्षमा और सहयोग जैसे सकारात्मक मूल्यों का भाव रामराज में व्याप्त आचार व्यवहार से ही पल्लवित हुआ है। अतः यह माना जा सकता है कि विश्व भर में रहने वाले सनातनी तो राम मंदिर को श्रद्धा और विश्वास के साथ निहार ही रहे हैं, इससे बढ़कर बात यह है कि विभिन्न धर्मों, मतों, संप्रदायों की विश्व बिरादरी भी अयोध्या तथा राम मंदिर पर टकटकी लगाए हुए है।
यहां एक बात का उल्लेख करना आवश्यक प्रतीत होता है, वह यह कि कांग्रेस एवं उसके सहयोगी दलों ने श्री रामलला की मूर्तियों के प्राण प्रतिष्ठा समारोह को लेकर नकारात्मक रवैया अपना रखा है। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण एवं अफसोस की बात है। प्रस्तावित प्राण प्रतिष्ठा समारोह के अलावा हर स्थान और विषय के लिए इन राजनीतिक दलों तथा उनके नेतृत्वकर्ताओं के पास पर्याप्त समय है। लेकिन अयोध्या जाने को लेकर ये सभी लोग घोषित तौर पर अस्पृश्यता का भाव बनाए हुए हैं। ऐसे शुभ प्रसंग के बीच राजनेताओं का इस प्रकार का आचरण मन को व्यथित करता है।