आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : बिजनेसमैन आनंद महिंद्रा ने मंगलवार को उत्तरकाशी टनल में फंसे 41 मजदूरों के रेस्क्यू में शामिल रहे ऑस्ट्रेलिया के माइक्रो टनलिंग एक्सपर्ट अर्नोल्ड डिक्स का वीडियो शेयर किया। वीडियो में अर्नोल्ड कहानी सुनाने के अंदाज में एक पत्रकार को रेस्क्यू के बारे में जानकारी दी।

अर्नोल्ड कह रहे हैं – ‘हमने माउंटेन से पूछा कि क्या आप हमारे बच्चों को वापस दे सकते हैं। जवाब में माउंटेन ने कहा कि- शायद… मुझे माफ करना’ इसके बाद भी हमने पहाड़ को खोदना जारी रखा। जैसे ही हमें लगा कि हम मजदूरों तक पहुंच गए हैं। फिर कोई न कोई बाधा सामने आ जाती है।

इस पर आनंद महिंद्रा ने कहा कि स्टोरी टेलिंग हमारी संस्कृति में हैं, लेकिन हमें उस स्किल को निखारने की जरूरत है। आज हमें एक ऑस्ट्रेलियाई इस बारे में मास्टर क्लास दे रहा है।

अर्नोल्ड डिक्स ने रेस्क्यू ऑपरेशन की जानकारी देते हुए कहा- यह ऐतिहासिक ऑपरेशन है, एक पहाड़ में 41 मजदूर फंस गए। वे अच्छे लोग थे, काम करने वाले लोग थे, जिन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया। हमने उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने का जिम्मा उठाया। मलबे में पाइप डालकर हमने उन्हें खाना और पानी भेजने का इंतजाम किया, दवाएं पहुंचाई हैं।

सभी 41 मजदूर बाहर निकाले गए

उत्तराखंड की सिल्क्यारा-डंडालगांव टनल में 12 नवंबर से फंसे सभी 41 मजदूरों को बाहर निकाल लिया गया है। मजदूरों को अस्पताल भेजा गया है। पहला मजदूर शाम 7.50 बजे बाहर निकाला गया था। रात 8.35 बजे तक सभी को निकाल लिया गया। उन्हें एम्बुलेंस से अस्पताल भेजा गया।

इस ट्रिक से निकाले मजदूर

टनल के अंदर बनाया गया अस्पताल

टनल के अंदर एम्बुलेंस के अलावा स्ट्रेचर और गद्दे पहुंचाए गए थे। यहां अस्पताल बनाया गया था।

21 घंटे में की 12 मीटर खुदाई

इससे पहले, सिल्क्यारा साइड से हॉरिजॉन्टल ड्रिलिंग में लगे रैट माइनर्स, हादसे के 17वें दिन दोपहर 1.20 बजे खुदाई पूरी कर पाइप से बाहर आ गए। उन्होंने करीब 21 घंटे में 12 मीटर की मैन्युअल ड्रिलिंग की। 24 नवंबर को मजदूरों की लोकेशन से महज 12 मीटर पहले ऑगर मशीन टूट गई थी। जिससे रेस्क्यू रोकना पड़ा था।

इसके बाद सेना और रैट माइनर्स को बाकी के ड्रिलिंग के लिए बुलाया गया था। मंगलवार सुबह 11 बजे मजदूरों के परिजन के चेहरों पर तब खुशी दिखी, जब अफसरों ने उनसे कहा कि उनके कपड़े और बैग तैयार रखिए। जल्द ही अच्छी खबर आने वाली है।

रैट माइनर्स ने 21 घंटे में 12 मीटर की ड्रिलिंग पूरी की, देखें 3 तस्वीरें…

रैट माइनर्स ने टनल के अंदर से कुछ इस तरह छोटे फावड़े से मिट्टी निकाली।

सिल्क्यारा टनल में फंसी ऑगर मशीन की ब्लेड 27 नवंबर की सुबह निकाली गई।

टनल में पाइप के अंदर से मैन्युअल ड्रिल करके जो मलबा इकट्ठा हो हुआ, उसे इस ट्रॉली से बाहर निकाला गया। इससे एक बार में 2.5 क्विंटल मलबा बाहर निकाला गया।

अब तक क्या हुआ?

27 नवंबर: सुबह 3 बजे सिल्क्यारा की तरफ से फंसे ऑगर मशीन के 13.9 मीटर लंबे पार्ट्स निकाल लिए। देर शाम तक ऑगर मशीन का हेड भी मलबे से निकाल लिया गया। इसके बाद रैट माइनर्स ने मैन्युअली ड्रिलिंग शुरू कर दी। रात 10 बजे तक पाइप को 0.9 मीटर आगे पुश भी किया गया। साथ ही 36 मीटर वर्टिकल ड्रिलिंग हो गई थी।

26 नवंबर: उत्तरकाशी की सिल्क्यारा टनल में फंसे 41 मजदूरों को बाहर निकालने के लिए पहाड़ की चोटी से वर्टिकल ड्रिलिंग शुरू हुई। रात 11 बजे तक 20 मीटर तक खुदाई हुई। वर्टिकल ड्रिलिंग के तहत पहाड़ में ऊपर से नीचे की तरफ बड़ा होल करके रास्ता बनाया जा रहा है। अधिकारियों ने कहा- अगर कोई रुकावट नहीं आई तो हम 100 घंटे यानी 4 दिन में मजदूरों तक पहुंच जाएंगे।

25 नवंबर: शुक्रवार को ऑगर मशीन टूटने के चलते रुका रेस्क्यू का काम शनिवार को भी रुका रहा। इंटरनेशनल टनलिंग एक्सपर्ट अरनॉल्ड डिक्स ने कहा है कि अब ऑगर से ड्रिलिंग नहीं होगी, न ही दूसरी मशीन बुलाई जाएगी।

मजदूरों को बाहर निकालने के लिए दूसरे विकल्पों की मदद ली जाएगी। बी प्लान के तहत टनल के ऊपर से वर्टिकल ड्रिलिंग की तैयारी हो रही है। NDMA का कहना है कि मजदूरों तक पहुंचने के लिए करीब 86 मीटर की खुदाई करनी होगी।

24 नवंबर: सुबह ड्रिलिंग का काम शुरू हुआ तो ऑगर मशीन के रास्ते में स्टील के पाइप आ गए, जिसके चलते पाइप मुड़ गया। स्टील के पाइप और टनल में डाले जा रहे पाइप के मुड़े हुए हिस्से को बाहर निकाल लिया गया। ऑगर मशीन को भी नुकसान हुआ था, उसे भी ठीक कर लिया गया।

इसके बाद ड्रिलिंग के लिए ऑगर मशीन फिर मलबे में डाली गई, लेकिन टेक्निकल ग्लिच के चलते रेस्क्यू टीम को ऑपरेशन रोकना पड़ा। उधर, NDRF ने मजदूरों को निकालने के लिए मॉक ड्रिल की।

23 नवंबर: अमेरिकी ऑगर ड्रिल मशीन तीन बार रोकनी पड़ी। देर शाम ड्रिलिंग के दौरान तेज कंपन होने से मशीन का प्लेटफॉर्म धंस गया। इसके बाद ड्रिलिंग अगले दिन की सुबह तक रोक दी गई। इससे पहले 1.8 मीटर की ड्रिलिंग हुई थी।

22 नवंबर: मजदूरों को नाश्ता, लंच और डिनर भेजने में सफलता मिली। सिल्क्यारा की तरफ से ऑगर मशीन से 15 मीटर से ज्यादा ड्रिलिंग की गई। मजदूरों के बाहर निकलने के मद्देनजर 41 एंबुलेंस मंगवाई गईं। डॉक्टरों की टीम को टनल के पास तैनात किया गया। चिल्यानीसौड़ में 41 बेड का हॉस्पिटल तैयार करवाया गया।

21 नवंबर: एंडोस्कोपी के जरिए कैमरा अंदर भेजा गया और फंसे हुए मजदूरों की तस्वीर पहली बार सामने आई। उनसे बात भी की गई। सभी मजदूर ठीक हैं। मजदूरों तक 6 इंच की नई पाइपलाइन के जरिए खाना पहुंचाने में सफलता मिली। ऑगर मशीन से ड्रिलिंग शुरू हुई।

केंद्र सरकार की ओर से 3 रेस्क्यू प्लान बताए गए। पहला- ऑगर मशीन के सामने रुकावट नहीं आई तो रेस्क्यू में 2 से 3 दिन लगेंगे। दूसरा- टनल की साइड से खुदाई करके मजदूरों को निकालने में 10-15 दिन लगेंगे। तीसरा- डंडालगांव से टनल खोदने में 35-40 दिन लगेंगे।