सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क्स / आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ /एजेंसियाँ/ भोपाल: अमेठी में दिव्यांग बुजुर्ग के कार्ड में बड़ी चूक, पांच साल से भटक रहे

अमेठी। उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में दिव्यांगता प्रमाण पत्र में गंभीर गड़बड़ी का मामला सामने आया है। पैरों से दिव्यांग बुजुर्ग विनोद कुमार द्विवेदी के यूनिक डिसेबिलिटी आईडी (UDID) कार्ड में उनकी वास्तविक दिव्यांगता के बजाय आंखों से कम दिखाई देने यानी ‘लो-विजन’ की श्रेणी दर्ज कर दी गई। इस गलती को सुधरवाने के लिए बुजुर्ग पिछले पांच साल से सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी समस्या का समाधान नहीं हो सका है। ट्राईसाइकिल की जगह मिल रही आंखों वाली छड़ी मामला अमेठी के जामो थाना क्षेत्र का है। विनोद कुमार द्विवेदी का कहना है कि कार्ड में गलत दिव्यांगता श्रेणी दर्ज होने के कारण उन्हें अपनी जरूरत के मुताबिक सरकारी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। उन्हें चलने-फिरने में सहायता के लिए ट्राईसाइकिल जैसे उपकरण की जरूरत है, लेकिन कथित तौर पर गलत रिकॉर्ड के कारण उन्हें आंखों से संबंधित समस्या में इस्तेमाल होने वाली छड़ी दे दी जाती है।

विनोद के पड़ोसी देव नारायण ने भी बताया कि बुजुर्ग बचपन से पैरों की दिव्यांगता से प्रभावित हैं। इसके बावजूद उनके कार्ड में आंखों से जुड़ी समस्या दर्ज है। इस विसंगति के कारण उन्हें आवश्यक सहायक उपकरण प्राप्त करने में परेशानी हो रही है। सीएमओ ने पोर्टल की तकनीकी समस्या बताई

मामला सामने आने के बाद अमेठी के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अंशुमान सिंह ने बताया कि यूडीआईडी पोर्टल में तकनीकी दिक्कतों के कारण ऐसी समस्याएं सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि पोर्टल की खामियों को दूर करने का काम चल रहा है। सीएमओ के मुताबिक, विनोद द्विवेदी का मामला अभी उनके संज्ञान में नहीं था, लेकिन जानकारी मिलने पर समाधान कराने का प्रयास किया जाएगा। पांच साल की परेशानी के बाद समाधान की उम्मीद

यूडीआईडी कार्ड दिव्यांगजनों की पहचान और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज है। इसमें गलत जानकारी दर्ज होने से संबंधित व्यक्ति को आवश्यक सुविधाएं प्राप्त करने में बाधा आ सकती है। विनोद कुमार द्विवेदी की मांग है कि उनके प्रमाण पत्र में वास्तविक दिव्यांगता के अनुसार सुधार किया जाए, ताकि उन्हें जरूरत के मुताबिक सहायक उपकरण और अन्य पात्र सुविधाएं मिल सकें। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इस मामले में कितनी जल्दी सुधार करता है और बुजुर्ग को राहत मिल पाती है या नहीं।


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