आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : असम राइफल्स के जवानों ने मणिपुर पुलिस की टीम को उग्रवादियों के हमले से बचाया। पुलिस को दी गई कवर फायरिंग का एक वीडियो सामने आया है। जिसमें जवान, घायल पुलिस कर्मियों को बख्तरबंद गाड़ी में बिठाते हुए दिखाई दे रहे हैं।

दरअसल, 31 अक्टूबर को इंफाल और भारत-म्यांमार बॉर्डर पर मोरेह हाईवे पर पुलिस का काफिला जा रहा था। पहाड़ी में छिपे उग्रवादियों ने उन पर घात लगाकर हमला कर दिया। उस दिन तीन पुलिस कर्मी गंभीर रूप से घायल हुए थे।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मुठभेड़ में किसी भी जवान या पुलिस कर्मी की मौत नहीं हुई। ये सभी एक SDOP चिंगथम आनंद कुमार की हत्या के बाद पुलिस की मदद के लिए मोरेह जा रहे थे। लेकिन उग्रवादियों ने उन पर हमला कर दिया।

मणिपुर में जातीय आरक्षण को लेकर कुकी और मैतेई समुदायों के बीच 3 मई से हिंसा चल रही है, जिसमें अब तक 187 लोग जान गंवा चुके हैं। वहीं, 1100 से ज्यादा लोग घायल हो चुके हैं।

मणिपुर में नवंबर में हुए घटनाक्रम

1 नवंबर- इंफाल में देर रात 31 अक्टूबर को हुई SDOP की हत्या से नाराज भीड़ ने मणिपुर राइफल्स के शिविर पर हमला किया था। इनका मकसद हथियार लूटना था। हालांकि, सुरक्षाकर्मियों ने कई राउंड हवाई फायरिंग कर भीड़ को तितर-बितर कर दिया।

5 नवंबर- इंफाल पश्चिमी जिले से दो युवक सेकमाई इलाके में जाने के लिए निकले थे। उसके बाद से दोनों की कोई खबर नहीं है। पुलिस ने लापता मैबम अविनाश (16) और निंगथोउजाम एंथनी (19) के मोबाइल सेनापति जिले में पेट्रोल पंप के पास से बरामद किए। राज्य में मोबाइल इंटरनेट पर बैन 8 नवंबर तक बढ़ा दिया गया है।

6 नवंबर- मणिपुर पुलिस ने 3 लोगों को हिरासत में लिया। इन पर दो युवकों के अपहरण का आरोप है। लापता युवकों के परिजन राज्यपाल अनुसुइया उइके और पुलिस से शिकायत की। उन्होंने इंफाल में रैली निकाली। रास्ते जाम कर प्रदर्शन किया।

मणिपुर के मौजूदा हालात…

मणिपुर में जिलों से लेकर सरकारी दफ्तर तक सब कुछ दो समुदायों में बंट चुके हैं। पहले 16 जिलों में 34 लाख की आबादी में मैतेई-कुकी साथ रहते थे, लेकिन अब कुकी बहुल चूराचांदपुर, टेंगनाउपोल, कांगपोकपी, थाइजॉल, चांदेल में कोई भी मैतेई नहीं बचा है। वहीं मैतेई बहुल इंफाल वेस्ट, ईस्ट, विष्णुपुर, थोउबल, काकचिंग, कप्सिन से कुकी चले गए हैं।

कुकी इलाकों के अस्पतालों मैतई डॉक्टरों के छोड़कर चले गए हैं। इससे यहां इलाज बंद हो गया। अब कुकी डॉक्टर कमान संभाल रहे हैं। सप्लाई नहीं होने से यहां मरहम-पट्‌टी, दवाओं की भारी कमी है।

सबसे ज्यादा असर स्कूलों पर हुआ है। 12 हजार 104 स्कूली बच्चों का भविष्य अटक गया है। ये बच्चे 349 राहत कैंपों में रह रहे हैं। सुरक्षाबलों की निगरानी में स्कूल 8 घंटे की जगह 3-5 घंटे ही लग रहे हैं। राज्य में 40 हजार से ज्यादा जवान तैनात हैं।

हिंसा के बाद से अब तक 6523 FIR दर्ज हुई हैं। इनमें ज्यादातर शून्य FIR हैं। इनमें 5107 मामले आगजनी, 71 हत्यारों के हैं। सीबीआई की 53 अधिकारियों की एक टीम 20 मामले देख रही है।

इंफाल वैली में एशिया का सबसे बड़ा महिला मार्केट इमा कैथल भी खुला हुआ है। कुकी जिलों के बाजार, स्कूल, दफ्तर में कोई मैतेई नहीं दिखेगा। यही हाल मैतेई इलाकों का है।

इंफाल वेस्ट, इंफाल ईस्ट, झिरिबम, विष्णुपुर, थोउबल, चूराचांदपुर और टेंगनाउपोल, कांगपोकपी, काकचिंग, फेरजॉल में कर्फ्यू लगा है। जबकि सेनापति, उर्खुल, कामजोंग, टेमेंगलोंग, नॉने और कप्सिन में शाम 6 से सुबह 5 बजे तक कर्फ्यू लगा है।