सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्कआईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (29 जनवरी) को महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर को NCP के बागी विधायकों की अयोग्यता पर फैसला लेने के लिए 15 फरवरी तक समय बढ़ा दिया है। डिप्टी सीएम अजीत पवार के गुट से जुड़े NCP विधायकों को अयोग्य ठहराने की मांग वाली शरद पवार गुट की तरफ से दाखिल की गई है।

राहुल नार्वेकर की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में दलील दी कि अयोग्यता की याचिकाओं पर आदेश देने के लिए कुछ और समय लगेगा। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने इन दलीलों को मान लिया। इससे पहले, कोर्ट ने इस फैसला करने के लिए स्पीकर को 31 जनवरी तक का समय दिया था।

NCP विधायक जयंत पाटिल ने याचिका दायर की थी

महाराष्ट्र विधानसभा में स्पीकर की ओर से विधायकों की अयोग्यता के मामले में एनसीपी (NCP) विधायक जयंत पाटिल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि अब तक विधानसभा स्पीकर राहुल नार्वेकर ने संबंधित विधायकों को नोटिस देकर पूछताछ के लिए तलब भी नहीं किया है।

उन्होंने कहा कि पिछले साल 2 जुलाई को विधायकों की अयोग्यता की अर्जी दी गई थी, जबकि रिमाइंडर और रिप्रेजेंटेशन पांच सितंबर और सात सितंबर को दिया गया था। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से अपील की कि अजित पवार और उनके गुट के विधायकों के खिलाफ अयोग्यता याचिकाओं पर जल्द निर्णय लेने के लिए स्पीकर नार्वेकर को आदेश दें।

अजित पवार ने शरद से नाता तोड़ा

अजित पवार ने पिछले साल 2 जुलाई को NCP के आठ विधायकों के साथ भाजपा-शिवसेना (एकनाथ शिंदे) के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार में शामिल हो गए थे। इसी दिन शिंदे सरकार में अजित ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। इसके बाद NCP दो धड़ों में बट गई थी। एक गुट अजित पवार और दूसरा शरद पवार का हो गया था।

9 जनवरी को स्पीकर ने शिवसेना (शिंदे गुट) के विधायकों की सदस्यता बरकरार रखी थी

इससे पहले स्पीकर राहुल नार्वेकर ने 9 जनवरी को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे समेत उनके गुट के 16 विधायकों की योग्यता पर फैसला सुनाया था। उन्होंने इस फैसले में शिंदे गुट को असली शिवसेना बताते हुए सभी विधायकों की सदस्यता बरकरार रखी थी। इसके साथ ही स्पीकर ने उद्धव गुट के 14 विधायकों की सदस्यता भी बरकरार रखी।

फैसले की 3 अहम बातें…

शिंदे के पास शिवसेना के 55 में से 37 विधायक, उनका गुट ही असली शिवसेना। चुनाव आयोग ने भी यही फैसला दिया था।

शिंदे को विधायक दल के नेता पद से हटाने का फैसला उद्धव का था, पार्टी का नहीं। शिवसेना संविधान के अनुसार वे अकेले किसी को पार्टी से नहीं निकाल सकते।

शिंदे गुट की तरफ से उद्धव गुट के 14 विधायकों को अयोग्य ठहराने की मांग खारिज। शिंदे गुट ने केवल आरोप लगाए, उनके समर्थन में सबूत नहीं दिए।

ठाकरे बोले- हमारी लड़ाई जारी रहेगी

शिंदे गुट को असली शिवसेना बताए जाने के बाद उद्धव ठाकरे ने कहा कि स्पीकर के फैसले से सुप्रीम कोर्ट की अवमानना हुई है। नतीजा मैच फिक्सिंग ही निकला, इसलिए हमारी लड़ाई जारी रहेगी। सुप्रीम कोर्ट उनके खिलाफ खुद संज्ञान लेकर कार्यवाही करे। पूरी खबर यहां पढ़ें…

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