सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : एम्स भोपाल में पहली किडनी प्रत्यारोपण प्रक्रिया सफलतापूर्वक संपन्न की गयी । ऐतिहासिक सर्जरी स्वास्थ्य सेवा के परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण प्रगति का प्रतीक है। इस जीवन रक्षक प्रक्रिया से रीवा के 32 वर्षीय पुरुष की ज़िंदगी अब पूरी तरह से बदल गयी है। वो पिछले तीन वर्षों से गुर्दे की बीमारी से जूझ रहा था।
ठीक होने की उनकी यात्रा तब शुरू हुई जब उन्होंने भूख न लगना, उल्टी और कमजोरी जैसे लक्षण के साथ एम्स भोपाल की ओपीडी में डाक्टर को दिखाया । गहन जांच के बाद, उनकी स्थिति का पता चला, जिसके बाद किडनी प्रत्यारोपण या डायलिसिस की सलाह दी गयी । मरीज ने किडनी प्रत्यारोपण का विकल्प चुना । किडनी प्रत्यारोपण के लिए उनके परिवार से संभावित दाताओं के सावधानीपूर्वक चयन की प्रक्रिया शुरू हुई, अंततः उनके पिता में रक्त समूह और ऊतक अनुकूलता का मिलान होने के बाद इस प्रक्रिया के लिए तैयारी की गयी ।
महेंद्र अटलानी के कुशल मार्गदर्शन में डी कौशल, एम कुमार, के. मेहरा, एस तेजपाल, एस. जैन और सौरभ की टीम ने इस जटिल सर्जरी को निर्बाध रूप से संपन्न किया । ऑपरेशन के बाद मरीज की सावधानीपूर्वक देखभाल की गयी। मरीज को दस दिन तक एंटी-रिजेक्शन दवा भी दी गयी जिससे शरीर किडनी को अस्वीकार न करे। आज मरीज की बेहतर रिकवरी को देखते हुए उसे अस्पताल से छुट्टी दी जा रही है।
प्रधानमंत्री आयुष्मान योजना के अंतर्गत रोगी को व्यापक चिकित्सा देखभाल प्राप्त हुई, जिससे मरीज पर कोई वित्तीय बोझ नहीं पड़ा। यह संपूर्ण प्रत्यारोपण प्रक्रिया नि:शुल्क प्रदान की गई, जो सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य देखभाल के प्रति एम्स भोपाल की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
एम्स भोपाल के अध्यक्ष सुनील मलिक और कार्यपालक निदेशक अजय सिंह दोनों ने कहा कि “प्रत्यारोपण (ट्रांसप्लांटेशन) स्वास्थ्य सेवाओं में सहयोग, विज्ञान और टीम वर्क का उदाहरण है”। दोनों ने एम्स भोपाल के संकाय और कर्मचारियों की भूमिका की सराहना करने के अलावा, राज्य सरकार और स्टेट ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट आर्गेनाइजेशन की भूमिका की भी सराहना की है।