आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : आगरा के दयालबाग में पुलिस पर लाठी चलाती औरतें। वर्दीधारियों को तारों पर धकियाती दूसरी वर्दी वाली औरतें। हवा में लाठियां भांजती ये औरतें। इनका दुस्साहस। इनकी भिड़ जाने की ताकत…। किसी को ये महिला पुलिस बल तो किसी को अर्धसैनिक बलों की वीरांगनाएं लगती हैं…। लठ भांजती और पुलिस वालों को खदेड़ती ये महिलाएं आखिर कौन हैं…?
दरअसल, 3 दिन पहले रविवार को दयालबाग में राधास्वामी सत्संगियों और पुलिस में भिड़ंत हो गई। मामला अवैध कब्जा हटाने से जुड़ा हुआ था। विवाद इतना बढ़ा कि पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ गया। इसी दौरान पुलिसकर्मियों से लोहा लेने के लिए सत्संगियों की महिला फोर्स यानी वर्दीधारी महिलाएं आ गईं।
ये लड़ाका महिलाएं पुलिसकर्मियों पर डंडे बरसाने लगी। कई पुलिसकर्मियों को घायल कर दिया। इस भिड़ंत के वीडियो खूब वायरल हुए। सत्संगियों की महिला फोर्स एकाएक चर्चा में आ गई। आखिर अद्धसैनिक बलों जैसी वर्दी में ये महिलाएं कौन हैं? इस सवाल का जवाब जानने के लिए आपको 10 साल पहले जाना पड़ेगा।
सत्संग सभा की खुद की फोर्स
दरअसल, 16 दिसंबर, 2012 को दिल्ली में निर्भया हत्याकांड हुआ। बस में छात्रा के साथ गैंगरेप हुआ। इसके कुछ महीने बाद आगरा के डीईआई में 15 मार्च, 2013 को लैब में नेहा शर्मा की हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड ने पूरे आगरा को हिला कर रख दिया था।
इसके अलावा, युवतियों के साथ आए दिन होने वाली छेड़छाड़ की घटनाओं को देखते हुए राधास्वामी सत्संग सभा ने सत्संगी लड़कियों को आत्मरक्षा के लिए लाठी-पीटी की ट्रेनिंग देना शुरू किया। शुरुआत में इसका उद्देश्य शोहदों से निपटने के लिए ट्रेंड करना था, लेकिन 10 साल में युवतियां शोहदों के बजाए पुलिस के सामने लाठी डंडे लेकर खड़ी हो गईं। सत्संग सभा ने अपनी खुद की इस फोर्स को नाम दिया है आरएएफ और एसएफजी।
शुरुआत शोहदों से निपटने को हुई थी, फिर बनी आरएएफ
राधास्वामी सत्संग सभा की ओर से सत्संग और डीईआई की छात्राओं को सशक्त बनाने के लिए सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग देना शुरू किया गया। शुरुआत में छात्राओं को चिली स्प्रे लेकर साथ चलने का आदेश हुआ। यहां तक सब ठीक था। सबने सत्संग सभा के फैसले का स्वागत किया।
बताया गया कि सत्संग में करीब चार साल पहले रैपिड एक्शन फोर्स बनाने का फैसला हुआ। इसमें 12 साल से लेकर 35 साल तक की युवतियों को शामिल किया गया। इन्हें लाठी चलाने में पूरी तरह से ट्रेंड किया। हर दिन सुबह-शाम खेतों में इनको ट्रेनिंग दी जाती है। दो दिन पहले डीसीपी सिटी के सामने शिकायत लेकर पहुंची रूही सत्संगी ने आरएएफ के बारे में बताया था।
सेना के रिटायर अधिकारी देते हैं ट्रेनिंग
सत्संगी रूही का दावा था कि इन्हें सत्संग सभा के सिक्योरिटी इंचार्ज जो सेना से रिटायर हैं, उनकी देख रेख में ट्रेनिंग दी जाती है। इन्हें आगरा से बाहर अलीगढ़ या मध्य प्रदेश के राजा बरारी में कैंप कराए जाते हैं। इनको पुलिस-प्रशासन और ग्रामीणों से भिड़ने के लिए ट्रेंड किया गया है। कोड वर्ड सिखाए जाते हैं। लाठी की कमांड मिलते ही आरएएफ की ये युवतियां सामने वाले पर टूट पड़ती हैं। ये तब तक पीछे नहीं हटतीं, जब तक इनको पीछे हटने का ऑर्डर न मिले।