नई दिल्ली । चीनी स्मार्टफोन कंपनी शाओमी पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापामार कार्रवाई में 5,551 करोड़ रुपये जब्त किए जाने के बाद कंपनी ने बयान जारी कर सफाई दी है। बयान में कहा गया है कि कंपनी एक प्रतिबद्ध ब्रांड के रूप में भारत के लिए पूरी तरह समर्पित है। बकोल शाओमी, ‘हमारे सभी कार्य भारतीय नियम और कानूनों के दृढ़ पालन के तहत होते हैं।’ शाओमी ने कहा है कि कंपनी ने सरकारी अधिकारियों के आदेश का अध्ययन किया है और उनके द्वारा बैंक को दिए विवरण व रॉयल्टी भुगतान सत्य और वैध हैं।
कंपनी के प्रवक्ता ने कहा है, ‘शाओमी इंडिया द्वारा किए गए रॉयल्टी भुगतान लाइसेंस प्राप्त तकनीकों और हमारे उत्पादों के भारतीय वर्जन में इस्तेमाल किए जाने वाले आईपी के लिए थे। शाओमी इंडिया एक वैध वाणिज्यिक व्यवस्था के तहत यह भुगतान करती है।’ हालांकि, हम किसी भी गलतफहमी को दूर करने के लिए अधिकारियों से बातचीत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
ईडी ने एक बयान जारी कर कहा है कि कंपनी गोरखधंधे में लिप्त है और विदेशी मुद्रा अधिनियम 1999 के तहत इस कार्रवाई को अंजाम दिया गया है। इससे पहले ईडी अवैध रेमिटेंस के मामले में जांच शुरू की थी। ईडी कंपनी के ग्लोबल वाइस प्रेसिडेंट मनु कुमार जैन को भी तलब कर चुकी है।
खबर के अनुसार, शाओमी ने जिन 3 कंपनियों को रॉयल्टी दी है उनसे कोई सेवा नहीं ली है। इन तीन कंपनियों में 1 शाओमी समूह की इकाई है जबकि बाकी 2 कंपनियां यूएस आधारित संस्थानों से जुड़ी हैं। इससे मनी लॉन्डरिंग का संदेह पैदा हुआ है। कंपनी पर आरोप है कि वह अवैध रूप से कमाई गई रकम देश से बाहर भेज रही है। इसके अलावा कंपनी ने फेमा का उल्लंघन करते हुए करोड़ों रुपये का निवेश भारत में किया है।
शाओमी भारत में एमआई या रेडमी ब्रांड नाम के साथ करोबार करती है। कंपनी ने 2014 में भारत में अपना बिजनेस शुरु किया था। यह पूरी तरह से चीनी स्वामित्व वाली कंपनी है। कंपनी ने भारत में करोबार शुरू करने के अगले साल यानी 2015 से पैसा बाहर भेजना शुरू कर दिया था।