सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : मध्य प्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का विषय था व्यक्तित्व विकास। कार्यशाला का आयोजन विश्वविद्यालय के सभागार कक्ष में किया गया। इस अवसर पर कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में अतुल कोठारी, राष्ट्रीय सचिव, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, नई दिल्ली एवम विशिष्ट अतिथि के रूप में अशोक कड़ैल, संचालक, मध्य प्रदेश हिंदी ग्रंथ अकादमी, भोपाल उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति संजय तिवारी द्वारा की गई।
कार्यक्रम के आरंभीय उद्बोधन में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित अतुल कोठारी ने कहा कि, जीवन में कुल पांच कोश है जो व्यक्ति का व्यक्तित्व निर्धारित करते हैं। उन्होंने अपने वक्तव्य में जीवन का परिचय एवं व्यक्तित्व के ऊपर अनेक उदाहरण देकर अपने अंतर्मन की बात श्रोताओं तक पहुंचाई। उन्होंने भौतिक मूल्यों, संस्कारों और दिनचर्या को समावेश करते हुए स्वामी विवेकानंद के पहनावे पर विदेश उठे सवाल को भी अपने उद्बोधन में सम्मिलित किया। उन्होंने कहा कि भारत में व्यक्तित्व ही चरित्र का आधार होता है। कोठारी ने अनेक उदाहरणों के साथ अपनी बात को समझाते हुए यह भी कहा कि जीवन में जो अच्छे मूल्यों को लेकर सही रास्ते पर चलता है वह ही नैतिक कहलाता है। उन्होंने जीवन में प्रतिदिन उपयोग होने वाले पांच कोषों से भी परिचित कराया। जिसमें अन्नमयकोष, प्राणकोष, मनोमय कोष, विज्ञान कोष एवम आनंदमय कोष सम्मिलित हैं। कोठारी ने सभी पांचो कोषों को विस्तार पूर्वक उदाहरण सहित समझाते हुए अंत में कहा कि जीवन में किसी की मदद करना और उसे अच्छे मुकाम तक पहुंचाना ही जीवन का परम आनंद है एवं निस्वार्थ भावना से सेवा करना ही आध्यात्मिकता है।
मध्य प्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति संजय तिवारी ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि, श्री कोठारी द्वारा बताई गई बातों को जीवन में अगर हम उतारते हैं, तो हमारा जीवन अवश्य सफल होगा और इससे व्यक्ति का ही नहीं व्यक्तित्व का भी विकास होगा। उन्होंने दो वाक्य के माध्यम से अपनी बात कही “बच्चों के हाथों को चांद सितारे छूने दो, चार किताबें पढ़ने दो, तब वह हमारी तरह हो जाएंगे”। प्रोफेसर तिवारी ने अपने उद्बोधन में यह भी कहा कि रामलला तो आ गए पर राम राज्य कब आएगा यह हमें तय करना होगा। ज्ञान अर्जन करने से व्यक्ति में सौम्यता नहीं आती, सही संस्कार ही व्यक्तित्व विकास करता है। अंत में उन्होंने कहा की कौशल विकास का सपना व्यक्तित्व विकास से ही पूरा होगा, इसीलिए व्यक्ति का विकास नहीं व्यक्तित्व विकास जरूरी है।
कार्यशाला के अंतिम चरण में विश्वविद्यालय के कुल सचिव एवं कार्यक्रम के संयोजक सुशील मंडेरिया ने “व्यक्तित्व विकास” विषय पर आयोजित इस कार्यशाला में उपस्थित सभी अतिथियों, अधिकारियों, क्षेत्रीय निदेशकों, शिक्षकों एवं समस्त विश्वविद्यालय परिवार का आभार व्यक्त कर धन्यवाद ज्ञापन किया। इस अवसर पर मंच संचालन विश्वविद्यालय के निदेशक डॉ रतन सूर्यवंशी द्वारा किया गया।