आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद के दोनों सदनों में आपराधिक न्यायिक प्रणाली में सुधार के तीन विधेयक प्रस्तुत किये एवं दोनों सदनों में यह विधेयक ध्वनिमत से पारित होने के पश्चात् एक नए युग की शुरुआत हो गयी है।
भारत में अब भारतीय न्याय संहिता विधेयक 2023 जो आईपीसी, 1860 को प्रतिस्थापित करेगा
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता विधेयक 2023 जो सीआरपीसी, 1898 को प्रतिस्थापित करेगा
भारतीय साक्ष्य विधेयक, 2023 जो साक्ष्य अधिनियम, 1872 को प्रतिस्थापित करेगा।
इन विधेयकों की शुरूआत ऐसे समय में हुई है जब विश्व तेजी से तकनीकी प्रगति, सामाजिक परिवर्तन और विकसित हो रहे वैश्विक मानकों को देख रहा है। ब्रिटिश काल के दौरान बनाए गए मौजूदा कानूनों कि अक्सर पुराने होने और समकालीन जरूरतों के अनुरूप नहीं होने के कारण आलोचना की जाती रही है। नए कानून 21वीं सदी के साथ कानूनी प्रणाली को संरेखित करने की मोदी सरकार कि मंशा को दर्शाते हैं, जिसमें नागरिक-केंद्रित कानूनी संरचनाओं, लिंग तटस्थता, डिजिटल परिवर्तन और सजा के बजाय न्याय पर ध्यान केंद्रित करने पर जोर दिया गया है। इन परिवर्तनकारी कानूनी सुधारों का उद्देश्य भारत की आपराधिक न्याय प्रणाली को नया आकार देना, नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा और न्याय के कुशल प्रशासन को सुनिश्चित करना है।
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व एव हमारे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प शक्ति का परिणाम था कि सभी हितधारकों के साथ व्यापक चर्चा के बाद इन कानूनों को लाया गया है। स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से देश के नाम अपने सम्बोधन में कहा था कि “ …ये समय गुलामी की मानसिकता से मुक्त होकर, अपनी विरासत पर गर्व करने का है“ और आजादी के अमृतकाल में भारत ने संकल्प लिया है कि उन सभी गुलामी के प्रतीकों से मुक्ति पाना है।