आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : लैपटॉप पर टकटकी लगाए दौड़ती उंगलियां, निगाहें स्क्रीन पर तेजी से ऊपर-नीचे होती और तूफान से तेज चलता दिमाग। ये लड़की बड़े से बड़े कोडवर्ड को अनलॉक कर सकती है। धोखेबाजों को कुर्सी पर बैठे-बैठे ही धूल चटा सकती है। हम बात कर रहे हैं गाजियाबाद की कामाक्षी शर्मा की।
महज 24 की उम्र में कामाक्षी ने साइबर क्राइम के 7000 से ज्यादा केस सॉल्व किए हैं। 50 हजार पुलिसवालों के बीच जाकर हैकर्स को ऑनलाइन दबोचने की ट्रेनिंग दे चुकी हैं। इसलिए तो खुद यूपी पुलिस उन्हें ‘जीनियस गर्ल’ कहकर बुलाती है।
इतनी कम उम्र में कामाक्षी ने ऐसे कठिन मामलों को सुलझा दिया, जो पुलिस के लिए सिरदर्द बने हुए थे। इसी स्मार्टनेस के लिए उन्हें लंदन बुक ऑफ अवॉर्ड और एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड जैसे बड़े सम्मान मिल चुके हैं।
ये पुरस्कार सबूत हैं कामाक्षी की मेहनत, उनकी लगन और उनकी हार न मानने वाली आदत के, जिसकी वजह से आज सैकड़ों परिवार बर्बाद होने से बच गए हैं। कामाक्षी ने जिन लोगों को हैकर्स के चक्रव्यूह से बचाया, वे आज भी उन्हें किसी देवी से कम नहीं मानते।
‘9 दिन 9 नारियां’ सीरीज में नवमी के दिन आखिरी कहानी गाजियाबाद की टेक-गर्ल कामाक्षी की है। चलिए आपको उनकी जिंदगी के और करीब ले चलते हैं…
दोस्तों की ID हैक करने में मजा आता था, यही करियर बना
यूपी के गाजियाबाद में एक मिडिल क्लास फैमिली से आने वाली कामाक्षी बचपन में इंजीनियर बनना चाहती थीं। लेकिन कॉलेज के दिनों की उनकी एक आदत आगे चलकर उनका करियर बन गई। कामाक्षी कहती हैं, “12वीं के बाद मैं ग्रेजुएशन के लिए गढ़वाल यूनिवर्सिटी उत्तराखंड चली गई। कॉलेज के दिनों में मुझे इंटरनेट पर हैकिंग करने का बहुत शौक था। मैं पढ़ाई के साथ-साथ मस्ती में ही अपने दोस्तों की ID हैक कर लेती थी। फिर वही लोग अपनी लॉक हुई प्रॉफाइल खुलवाने मेरे पास आते थे। लेकिन असली झटका तब लगा जब मेरी खुद की नकली फेसबुक ID बन गई।”
“मेरी फेक ID बन गई है सर…कोई भी मेरे साथ साइबर क्राइम कर सकता है।”…मैंने पूरी बात डीन सर को बताई। ये सुनकर उन्होंने कहा कि जब तुम्हें खुद हैकिंग आती है तो तुम ये भी पता लगा सकती हो कि तुम्हारी नकली ID किसने बनाई। उनकी ये बात मेरे दिमाग में क्लिक की। मुझे समझ आया कि हैकिंग से इंवेस्टिगेशन भी हो सकती है।
सबसे पहले मैंने खुद की नकली ID ब्लॉक की। इसके बाद मैंने बहुत से ऐसे बच्चों की हेल्प की जिनकी ID हैक हो गई थी। धीरे-धीरे इस काम में मेरा इंट्रेस्ट बढ़ता चला गया। मुझे लगा कि जब मैं अपने दोस्तों की हेल्प कर सकती हूं, तो क्यों न उन लोगों के लिए भी कुछ करूं जो साइबर फ्रॉड का शिकार बन जाते हैं।”
अपने पैशन के लिए गूगल-फेसबुक के ऑफर ठुकरा दिए
कामाक्षी ने कंप्यूटर साइंस में बीटेक पूरा करके साल 2019 में इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। लेकिन उसके बाद कहीं नौकरी करने नहीं गईं। उनका सपना था साइबर क्राइम के खिलाफ वह पुलिस और दूसरी सुरक्षा एजेंसियों की मदद करें। उन्होंने इसको ही अपना मकसद बना लिया।
कामाक्षी कहती हैं, “कॉलेज के बाद बड़ी-बड़ी कंपनियों में नौकरी के ऑफर मिले। मुझे गूगल-फेसबुक की तरफ से एथिकल हैकर के तौर पर बेहतर सैलरी पैकेज पर बुलाया गया। लेकिन मैंने सभी ऑफर ठुकरा दिए। मैं नहीं चाहती थी कि मैं किसी विदेशी प्राइवेट कंपनी में रहकर नॉर्मल सी ऑफिस लाइफ बिताऊं। मेरा ड्रीम था कि मैं साइबर सिक्योरिटी की फील्ड में देश की सेना और पुलिस की मदद करूं…उनके साथ काम करूं। इसलिए मैंने हमेशा अपने पैशन को फॉलो किया।”
किडनैपिंग केस सुलझाकर जीता यूपी पुलिस का भरोसा
शुरुआती दिनों में कामाक्षी खुद ही पुलिस थानों में जाकर ऑफिसर्स के सामने मदद की पेशकश करतीं। हालांकि, शुरू-शुरू में उन्हें निराशा हाथ लगी क्योंकि पुलिस भला क्यों किसी पर भरोसा करती। लेकिन एक दिन उनकी मेहनत रंग लाई जब गाजियाबाद के सिहानी गेट कोतवाली के इंस्पेक्टर विनोद पांडे ने एक किडनैपिंग केस में कामाक्षी से मदद मांगी।
इस केस के बारे में कामाक्षी बताती हैं, “किडनैपर्स ने HCL कंपनी के एक कर्मचारी को अगवा कर लिया था। लेकिन पुलिस उन्हें ट्रेस नहीं कर पा रही थी, क्योंकि किडनैपर्स लगातार वॉट्सऐप कॉल पर पैसे मांग रहे थे। उस समय वॉट्सऐप कॉल को ट्रेस करना मामूली बात नहीं थी। लेकिन मैंने अपनी हैकिंग स्किल्स से न सिर्फ उन किडनैपर्स की लोकेशन ट्रैक की बल्कि पुलिस को ये भी बता दिया कि किन-किन जगहों से फोन किए गए हैं। मेरी काबिलियत देख पुलिसवाले दंग रह गए। अपराधी पकड़े गए और उस कर्मचारी को छुड़ा लिया गया।”
50 हजार पुलिसवालों को दी साइबर सुरक्षा की ट्रेनिंग
कामाक्षी के नाम एक अनोखा रिकॉर्ड है। उन्होंने मात्र 35 दिनों में 50 हजार पुलिसकर्मियों और सेना के जवानों को साइबर सुरक्षा की ट्रेनिंग दी है। वह पुलिस लेकर सेना के जवानों को कोडिंग, फेक ID हैकिंग, इंटरनेट फ्रॉड एक्सपोजिंग जैसी तकनीक सिखा रही हैं। हाल ही में उन्होंने भारत में सीमापार से होने वाले साइबर हमलों पर सुरक्षा एजेंसियों के साथ एक वर्कशॉप भी की है। पुलिस विभाग समय-समय पर कई पेचीदा केस सुलझाने के लिए कामाक्षी की मदद लेता रहता है।