आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : नोएडा के निठारी कांड में सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंधेर की अपील इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंजूर कर ली। गाजियाबाद की CBI कोर्ट ने उन्हें पहले फांसी की सजा सुनाई थी। जिस पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्र और जस्टिस एसएचए रिजवी की बेंच ने फैसला सुनाया है। लंबी चली बहस के बाद अपीलों पर फैसला सितंबर महीने में सुरक्षित कर लिया गया था।

साल-2005 और 2006 में हुए निठारी कांड में बच्चियों, युवतियों और महिलाओं की रेप के बाद हत्या के कुल 19 मुकदमे दर्ज हुए थे। इसमें तीन मुकदमों में पुलिस ने साक्ष्य के अभाव में क्लोजर रिपोर्ट लगा दी। 16 मुकदमों में CBI कोर्ट गाजियाबाद का फैसला आ चुका है। 13 मुकदमों में सुरेंद्र कोली को सजा-ए-मौत सुनाई और तीन में बरी किया गया।

वहीं मोनिंदर पंधेर को दो मुकदमों में फांसी, एक मुकदमे में सात साल की सजा सुनाई गई और चार मुकदमों में बरी किया गया था। फांसी की सजा के खिलाफ दोनों दोषियों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। फांसी की सजा के सभी मुकदमों में हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया है। उनकी फांसी की सजा पर रोक लगा दी है।

निठारी की D-5 कोठी : जो लड़की यहां गई, वापस नहीं आई

नोएडा के सेक्टर-31 में निठारी गांव है। यहां D-5 कोठी में मोनिंदर सिंह पंधेर रहता था। मोनिंदर सिंह मूल रूप से पंजाब का रहने वाला था। साल-2000 में उसने ये कोठी खरीदी थी। 2003 तक फैमिली भी साथ रही, इसके बाद मोनिंदर छोड़कर बाकी लोग पंजाब शिफ्ट हो गए। मोनिंदर घर में अकेला रहता था।

इसी दौरान उसने अल्मोड़ा (उत्तराखंड) का सुरेंद्र कोली बतौर नौकर घर में रख लिया। मोनिंदर सिंह अक्सर इस कोठी पर कॉलगर्ल बुलाता था। एक बार सुरेंद्र कोली ने वहां आई एक कॉलगर्ल से शारीरिक संबंध बनाने की इच्छा जताई तो कॉलगर्ल ने ऐसा कुछ कह दिया जो सुरेंद्र को बुरा लगा। सुरेंद्र ने गला दबाकर उसकी हत्या कर दी और लाश को बराबर में नाले में ठिकाने लगा दिया।

D-5 कोठी में ये पहला मर्डर था। इसके बाद तो जो लड़की इस कोठी में आई, वो जिंदा वापस नहीं गई। धीरे-धीरे इस इलाके से कई बच्चियां लापता होनी शुरू हो गईं। प्रत्यक्षदर्शियों ने उन्हें आखिरी बार इसी कोठी के बाहर देखा था, लेकिन ठोस सुबूत न होने से पुलिस मोनिंदर-सुरेंद्र पर हाथ नहीं डाल पाई।

रेप के बाद कर देते थे हत्या, नाले से मिले थे 19 से ज्यादा कंकाल

25 साल की आनंदा देवी भी इसमें एक थी। वो मोनिंदर पंधेर के घर में घरेलू सहायिका बनकर आई थी और 31 अक्टूबर 2006 को लापता हो गई। इससे पहले ऊधमसिंह नगर (उत्तराखंड) की दीपिका उर्फ पायल नौकरी की तलाश में 7 मई 2006 को मोनिंदर सिंह पंढेर के पास गई थी, वो भी वापस नहीं लौटी। 24 अगस्त 2006 को नोएडा पुलिस ने अपहरण का केस दर्ज कर जांच शुरू की तो दीपिका का मोबाइल सुरेंद्र कोली से मिला।

ये पहला केस था, जब किसी मामले में मोनिंदर पंधेर और सुरेंद्र कोली फंसे थे। पुलिस ने उनसे सख्ती से पूछताछ की तो उन्होंने दीपिका उर्फ पायल की रेप के बाद हत्या कर लाश कोठी के बराबर में नाले में फेंकने की बात कुबूली। 29 और 30 दिसंबर 2006 को नोएडा पुलिस ने नाले से बड़ी संख्या में मानव कंकाल बरामद किए, जो सिर्फ लड़कियों के थे।

खुलासा हुआ कि मोनिंदर पंधेर और सुरेंदर कोली यहां लड़कियों को किसी बहाने से बुलाते थे और रेप के बाद हत्या करके उनकी लाश इस नाले में फेंक देते थे। नोएडा पुलिस ने मोनिंदर सिंह पंढेर और सुरेंद्र कोली के खिलाफ रेप और हत्या के कुल 19 मामले दर्ज किए। इसमें से 16 मामलों में कोर्ट के फैसले आ चुके हैं।