सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्कआईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : बात 2007 की है। पाकिस्तान के आम चुनाव में महज 2 महीने बाकी थे। 27 दिसंबर को पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की नेता बेनजीर भुट्टो रावलपिंडी में एक रैली कर अपनी गाड़ी की तरफ बढ़ रही थीं। तभी एक 15 साल के लड़के बिलाल ने उन पर गोली चला दी और फिर धमाका कर खुद को उड़ा दिया।

बेनजीर की हत्या को 3 दिन ही हुए थे कि 30 दिसंबर को एक 19 साल के लड़के को पार्टी में उनके पद पर बैठा दिया गया। इतनी कम उम्र में पार्टी में चेयरमैन का पद उसे सियासी हुनर की वजह से नहीं मिला था।

दरअसल, चेयरमैन बनने वाला लड़का कोई और नहीं बल्कि बेनजीर भुट्टो और आसिफ अली जरदारी का बेटा बिलावल भुट्टो था। अब बेनजीर की मौत को 16 साल गुजर चुके हैं।

कल पाकिस्तान में चुनाव हैं। नवाज शरीफ 4 साल के देश निकाले के बाद सियासत के लिए मुल्क लौट चुके हैं। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान जेल में कैद हैं। इस बीच पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी ने एक बार फिर बिलावल पर दांव खेला है। उन्हें पार्टी की तरफ से प्रधानमंत्री पद का दावेदार घोषित किया है।

क्या वो पाकिस्तान की सियासत के तजुर्बेदार नवाज को हराकर फिर से पाकिस्तान को भुट्टो खानदान का प्रधानमंत्री दे पाएंगे…

3 महीने के थे बिलावल जब मां बेनजीर ने पहली महिला PM बन इतिहास रचा था

सितंबर 1988 में बिलावल भुट्टो जिस परिवार में पैदा हुए, उससे ये तय हो गया था कि वो पाकिस्तान की सियासत से अनछुए नहीं रह सकेंगे। बिलावल पाकिस्तान के आम चुनावों से लगभग दो महीने पहले 21 सितंबर 1988 को पैदा हुए थे, इस चुनाव में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी को जीत हासिल हुई थी।

जब उनकी मां बेनजीर ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली तब बिलावल लगभग 3 महीने के थे। बेनजीर न सिर्फ पाकिस्तान बल्कि पूरे मुस्लिम जगत की पहली महिला प्रधानमंत्री थीं। उनके नाना जुल्फिकार अली भुट्टो पहले पाकिस्तान के राष्ट्रपति और फिर प्रधानमंत्री रह चुके थे।

बिलावल के पिता आसिफ अली जरदारी भी पाकिस्तानी सियासत के जाने-माने चेहरे थे। हालांकि, बिलावल की मां और नाना की तुलना में आसिफ अली जरदारी की छवि ज्यादा मजबूत नहीं थी। बिलावल जब 2 साल के थे तो जरदारी को जेल जाना पड़ा था। उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। जरदारी पाकिस्तान में मिस्टर 10 परसेंट के नाम से कुख्यात थे।

उन पर आरोप थे कि उन्होंने अपनी पत्नी के प्रधानमंत्री बनने का फायदा उठाकर हर प्रोजेक्ट में 10 परसेंट का कमीशन लिया। 1988 से 2007 तक जरदारी ने 14 साल पाकिस्तान की जेल में बिताए। यानी बिलावल के बचपन के ज्यादातर वक्त उनके पिता जेल में थे।

बिलावल ने अपना ज्यादातर बचपन लंदन और दुबई में बिताया था। मां की मौत और अचानक पार्टी में इतने अहम पद पर बिठाए जाने के बावजूद बिलावल शुरुआत में राजनीति में एक्टिव नहीं रहे। वो हिस्ट्री में डिग्री हासिल करने के लिए ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी लौट गए।

2010 में वो वापस पाकिस्तान लौटे तो उनके पिता आसिफ और मुल्क के प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे हुए थे। गिलानी को 2 साल में ही कुर्सी छोड़नी पड़ी थी।

2 साल तक बिलावल भुट्टो पाकिस्तान में रहे, हालांकि इस वक्त भी वो पार्टी के कार्यक्रमों तक सीमित थे। उनकी ऑफिशियल एंट्री बेनजीर की 5वीं बरसी के दिन 27 दिसंबर 2012 को हुई। पाकिस्तान में आम चुनाव का मौका था। बिलावल को उनके पिता की अगुआई में एक रैली में पाकिस्तान की अवाम के सामने संबोधित करने के लिए लाया गया।

पहले भाषण के वक्त ठीक से उर्दू भी नहीं बोल पाते थे बिलावल

24 साल के बिलावल अपना पहला भाषण मुंह जुबानी याद कर आए थे। पहली बार था जब वो बिना किसी पर्चे के स्टेज पर थे। आसिफ अली जरदारी ने उनके हाथ को हवा में उठाकर जनता के सामने पेश किया। जियो टीवी के पत्रकार हामिद मीर के मुताबिक बिलावल की उर्दू अच्छी नहीं होने के बावजूद उन्होंने बिना हिचक अपना भाषण पढ़ा।

पहले भाषण में भुट्टो ने अंग्रेजी लहजे वाली उर्दू में कहा था – मैं जुल्फिकार अली भुट्टो का वारिस, मैं शहीद बेनजीर भुट्टो का बेटा आपसे पूछता हूं। मेरी मां के कातिल जो गिरफ्तार हैं, उन्हें सजा क्यों नहीं मिल रही है। अगर आप एक भुट्टो मारोगे तो हर घर से भुट्टो निकलेगा।

उन्होंने अपनी मां की तरह अवाम की रोटी कपड़ा और मकान की जरूरत पूरी करने का वादा किया। कुछ लोग उनमें बेनजीर की झलक देख पा रहे थे, हालांकि कुछ लोगों को वो अपने पिता की कठपुतली लग रहे थे, जो भुट्टो के नाम का इस्तेमाल कर सियासत में बने रहना चाहते थे।