सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : साल 2008 की बात है। एक बस निकारागुआ से ग्वाटेमाला आती है। इसमें सवार होते हैं-14 यात्री, एक ड्राइवर और एक कंडक्टर। ग्वाटेमाला की सीमा पार करते ही बस हाईजैक हो जाती है। ड्रग्स की तस्करी करने वाले अज्ञात लोग बस में चढ़ते हैं। इन्हीं के साथ चढ़ता है इनका सरगना रिगोबर्टो डेनिलो मोरालेस।
रिगोबर्टो एक के बाद एक बस में सवार सभी 16 लोगों को गोली मार देता है। फिर बस को दूसरी जगह ले जाकर सभी शवों को जला देता है। इस घटना के 16 साल बाद यानी 23 जनवरी 2024 को ग्वाटेमाला की एक कोर्ट ने रिगोबर्टो डेनिलो मोरालेस को 808 साल की सजा सुनाई है।
कोर्ट ने कहा- हर एक हत्या के लिए रिगोबर्टो को 50 साल की सजा सुनाई है। इसका मतलब यह हुआ की 16 हत्याओं के लिए वो 800 साल जेल में रहेगा। वहीं, 8 साल की सजा क्रिमिनल एक्टिविटीज के लिए दी गई है।
साथियों को भी सजा
2008 में रिगोबर्टो डेनिलो मोरालेस और उसके साथ बस में ड्रग्स की चोरी करने के मकसद से चढ़े थे। AFP न्यूज के मुताबिक मोरालेस को खबर मिली थी की निकारागुआ से ग्वाटेमाला आ रही बस में ड्रग्स है। इसे चुराने के लिए वो अपने साथियों के साथ बस में चढ़ गया था, लेकिन जब बस में ड्रग्स नहीं मिली तो उसने इसमें सवार सभी यात्रियों को गोली मार दी।
16 लोगों की हत्या करने के बाद वो इनके शवों को अपने दोस्त और बिजनेस पार्टनर मार्विन मोंटिएल मारिन के ठिकाने पर ले गया। यहां उसने बस के साथ सभी शवों को जला दिया। कोर्ट ने इस घटना से जुड़े सभी आरोपियों को कड़ी सजा सुनाई है। हालांकि, रिगोबर्टो के अलावा किसी की भी सजा से जुड़ी जानकारी सामने नहीं आई है।
14 साल बाद पुलिस की गिरफ्त में आया मोरालेस
2008 में 16 लोगों की हत्या करने और उनके शवों को जलाने के बाद मोरालेस फरार हो गया। 14 साल तक ग्वाटेमाला पुलिस उसे पकड़ नहीं पाई। 2022 में आखिरकार पुलिस मोरालेस को गिरफ्तार करने में कामयाब हुई। इसी साल उसने खिलाफ कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई। सुनवाई के दो साल बाद अब उसे सजा सुनाई गई।
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अमेरिका के कैलिफोर्निया शहर में ये बात सुनते ही पुलिस समझ जाती थी कि फिर कहीं हत्या हुई है। 1968 से 1974 के बीच एक के बाद एक 37 लोगों के कत्ल हुए, लेकिन पुलिस पहेलियों में फंसी रही। कातिल ऐसा था कि खून करने के बाद पुलिस को फोन करके अपना जुर्म कबूल कर लेता था। वो पुलिस स्टेशन और अखबारों के दफ्तरों में खत भेजता था। इनमें अजीब से कोड बने होते थे। इन्हें समझ पाना मुश्किल होता था।