आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : अनंतनाग में बुधवार को शहीद हुए न्यू चंडीगढ़ के कर्नल मनप्रीत सिंह अंतिम सफर पर निकल गए हैं। उनकी पार्थिव देह चंडीगढ़ के आर्मी कैंट से चंडीगढ़ के रास्ते न्यू चंडीगढ़ के लिए रवाना हो गई है। उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ उनके पैतृक गांव भड़ौजियां में किया जाएगा।

शहीद कर्नल को अंतिम विदाई देने के लिए लोग सड़कों पर उतर आए हैं। चंडीगढ़ से न्यू चंडीगढ़ के रास्ते पर सड़क किनारे लोग खड़े हैं। इससे पहले लोगों ने सड़क की सफाई भी की।

शहीद कर्नल मनप्रीत की पत्नी जगमीत ग्रेवाल हरियाणा के पंचकूला में पिंजौर सरकारी स्कूल में टीचर हैं। उनके 2 बच्चे 7 साल का बेटा कबीर और ढाई साल की बेटी बानी हैं।

पंजाब के गवर्नर और चंडीगढ़ के प्रशासक बनवारी लाल पुरोहित और पंजाब सरकार की तरफ से मोहाली से MLA और राज्य की टूरिज्म मिनिस्टर अनमोल गगन मान अंतिम संस्कार में शामिल होंगी।

PHOTOS में देखिए शहीद कर्नल की अंतिम विदाई….

मां को टीवी पर नहीं दिखा बेटा

शहीद कर्नल मनप्रीत सिंह की मां मनजीत कौर ने बताया कि वह अकसर टीवी पर जम्मू एवं कश्मीर की खबरें देखती थी। जब से उनका बेटा जम्मू कश्मीर में तैनात हुआ था तो उन्हें लगता था कि किसी दिन वह टीवी पर उन्हें दिख जाएगा, लेकिन जिस दिन बेटे की खबरें टीवी पर चली, उस दिन वह किसी वजह से टीवी नहीं देख पाई। टीवी पर अपने बेटे को देखने की ख्वाहिश उनकी अब हमेशा के लिए अधूरी रह गई है।

दोस्त बोले- मनप्रीत जो ठान लेते, उसे पूरा करके रहते

शहीद कर्नल के साथ पढ़े गांव के दीपक सिंह ने बताया कि मनप्रीत बचपन से ही काफी बहादुर थे। वह जो ठान लेते थे, उसको पूरा करके ही रहते थे। 2021 में ताबड़तोड़ फायरिंग कर रहे आतंकवादियों का सामना किया था और उन्हें ढेर कर दिया था। इसके बाद उन्हें सेना मेडल से सम्मानित किया गया था। मनप्रीत सिंह 19 राष्ट्रीय राइफल के कर्नल थे। सेना की इसी बटालियन ने 2016 में आतंकी बुरहान वानी को ठिकाने लगाया था।

घर आते तो लोगों की समस्या दूर करते

चंडीगढ़- कुराली हाईवे पर गांव भड़ोदिया के पास जूस की दुकान करने वाले बिल्ला ने बताया कि शहीद कर्नल मनप्रीत सिंह बहादुर ही नहीं बड़े दयालु इंसान भी थे। जब भी वह छुट्टियों पर घर आते थे तो उनकी दुकान पर जूस पीने जरूर आते थे। उनकी दुकान पर काम करने वाले लड़कों से बात कर उनकी समस्या जानते थे। फिर हर संभव मदद की कोशिश करते थे।

भाई की शहादत पर गर्व

शहीद के छोटे भाई संदीप कुमार ने कहा की 2014 में जब से उनके पिता की मौत हुई है, तब से उनके बड़े भाई कर्नल मनप्रीत सिंह ने उन्हें किसी भी प्रकार की कोई कमी नहीं आने दी। भाई के साथ-साथ पिता का फर्ज भी निभाया है। मुझे उनकी शहादत पर गर्व है, लेकिन उनकी कमी उसकी जिंदगी में हमेशा खलती रहेगी।